हिंदुस्तान जिंक की 'सखी' परियोजना का बड़ा धमाका: ग्रामीण महिलाओं का ब्रांड ‘दायची‘ अब ब्लिंकिट और मॉर्डन बाज़ार पर उपलब्ध

चित्तौड़गढ़। भारत की प्रतिष्ठित जिंक उत्पादक कंपनी हिंदुस्तान जिंक की 'सखी' पहल ने राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित ब्रांड ‘दायची‘ ने अब दिल्ली-एनसीआर के बड़े रिटेल स्टोर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट व मॉर्डन बाज़ार पर अपनी दस्तक दे दी है।
26,800 महिलाओं का सशक्तिकरण और करोड़ों का टर्नओवर
ग्रामीण आजीविका कार्यक्रम के तहत संचालित इस परियोजना ने अब तक 26,800 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया है। वर्तमान में यह ब्रांड 400 से अधिक महिलाओं द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है, जिसका टर्नओवर वित्त वर्ष 2026 में 2.60 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 2018-19 में महज 5 सिलाई यूनिट्स से शुरू हुआ यह सफर आज 14 प्रोडक्शन यूनिट्स और 300 से अधिक प्रोडक्ट्स तक विस्तृत हो चुका है।
शुद्धता और गुणवत्ता की पहचान: दायची
'दायची - द बेस्ट फ्रॉम रूरल इण्डिया' के तहत उच्च गुणवत्ता वाले एफएमसीजी उत्पाद जैसे अचार, शहद, मसाले, दालें, नमकीन, तेल और घी तैयार किए जाते हैं। ये उत्पाद पूरी तरह से ग्रामीण महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित हैं। अमेजन, फ्लिपकार्ट और ओएनडीसी के बाद अब क्विक कॉमर्स और बड़े रिटेल चेन से जुड़ना इन महिला उद्यमियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
नेतृत्व का विजन
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक अरुण मिश्रा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य महिलाओं के नेतृत्व वाले इन सूक्ष्म उद्योगों को मुख्यधारा के बाजार से जोड़ना है। ब्लिंकिट और मॉर्डन बाजार पर दायची की उपलब्धता ग्रामीण समुदायों की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
सखी परियोजना को महिला सशक्तिकरण के लिए बिजनेस वर्ल्ड और स्कोच जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इसके उत्पादों ने आईआईटीएफ, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल और मुंबई के काला घोड़ा फेस्टिवल में भी अपनी धाक जमाई है। कंपनी अब दिल्ली-एनसीआर के बाद अन्य बड़े शहरों में भी इस ब्रांड का विस्तार करने की योजना बना रही है।
