जावदा थाना या 'अजूबा'? 8 साल, 5 करोड़... फिर भी बिल्डिंग अधूरी; साहब को फुर्सत नहीं, नेताओं को फिक्र नहीं!

जावदा थाना या अजूबा? 8 साल, 5 करोड़... फिर भी बिल्डिंग अधूरी; साहब को फुर्सत नहीं, नेताओं को फिक्र नहीं!
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रतनगढ़।

अगर आपको 'कछुआ चाल' का जीता-जागता नमूना देखना है, तो जावदा के नए थाना भवन को देख लीजिए। साल 2018 में इस तीन मंजिला इमारत का काम शुरू हुआ था, लेकिन 2026 आ गया और यह आज भी "फिनिशिंग" के लिए तरस रही है। 5 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी यहाँ न कांच लगे हैं, न बिजली की फिटिंग पूरी हुई है और न ही ढंग से रंग-रोगन हुआ है।

साहब 'बिजी' हैं, जनता 'परेशान' है!

इस सुस्ती के बारे में जब जिला पुलिस अधीक्षक (SP) सुधीर जोशी से जवाब मांगना चाहा, तो 'सरकारी काम' की व्यस्तता का ऐसा पहरा रहा कि उन्होंने कॉल उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। शायद साहब के पास इस 'खंडहर' जैसे अधूरे थाने के लिए वक्त नहीं है।

माननीयों के 'दर्शन' तो हुए, पर 'आदेश' नहीं निकले!

क्षेत्र की जनता अब बेगूं विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की कार्यशैली पर भी चुटकी ले रही है। ग्रामीण कहते हैं कि "माननीय" जब भी इस इलाके के दौरे पर आते हैं, तो इस आलीशान अधूरी बिल्डिंग के 'दर्शन' जरूर करते हैं। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इतने रसूखदार नेताओं के इलाके में होने के बावजूद आज तक किसी ने ठेकेदार या विभाग को एक 'कड़ा आदेश' नहीं दिया कि भाई, इसे पूरा कब करोगे?

जनता का तीखा सवाल:

जितने समय में देश में बड़े-बड़े मंदिर और एक्सप्रेस-वे बन गए, उतने समय में एक थाना क्यों नहीं बन पाया?

क्या बॉर्डर पर सुरक्षा के दावों के बीच यह अधूरा थाना भवन केवल 'शो-पीस' बनकर रहेगा?

क्या राजनीतिक कसावट की कमी के कारण जनता के 5 करोड़ रुपये मिट्टी में मिल रहे हैं?

: जावदा थाना भवन आज प्रशासन की सुस्ती और नेताओं की उदासीनता का 'स्मारक' बन चुका है। अब देखना यह है कि क्या यह बिल्डिंग कभी पूरी होगी या 10वीं सालगिरह भी इसी 'अधूरी' हालत में मनाएगी?

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