वेदपीठ परिसर में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई महाशिवरात्रि

वेदपीठ परिसर में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई महाशिवरात्रि
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निम्बाहेड़ा मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ की ओर से फाल्गुन कृष्णा त्रयोदशी को महाशिवरारात्रि पर्व पूरी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान वेदपीठ परिसर में अखंड भारत का मानचित्र अंकित कर देश के विभिन्न स्थानों पर विराजित द्वादश ज्योतिलिंग को यतास्थान स्थापित करने के साथ ही 1 लाख 51 हजार पार्थिव शिवलिंगांे एवं ज्योर्तिलिंगांे का 21 द्रव्यों से नमक चमक एवं रुद्री पाठ के साथ महारूदाभिषेक किया गया। ठाकुर जी की संध्या महा आरती के पश्चात भगवान सदा शिव आशुतोष की विशेष पूजा अर्चना वेदपीठ के आचार्यो एवं बटुकांे द्वारा करने के साथ ही महारुद्राभिषेक का अनुष्ठान प्रारम्भ किया गया, जो भोर होते तक जारी रहा। इस दौरान समूचा परिसर भगवान शिव के पंचाअक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय से गुंजायमान रहा। लगभग 300 यजमान युगलों द्वारा भगवान शिव का महा रुद्राभिषेक करते हुए लगभग 11 लाख पंचा अक्षरी मंत्रांे का जाप कर देश प्रदेश, समाज एवं परिवार में खुशहाली की कामना की। इस दौरान श्रद्धालुओं द्वारा मनवांछित फल प्राप्ति की भावना से दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गन्ने एवं फलों का रस सहित पवित्र जलाशय एवं नदियों के जल से महारुद्राभिषेक करने के साथ ही मनवांछित फल प्राप्ति के लिए भगवान शिव को प्रिय कई प्रकार के पदार्थ एवं 108 शिव नामावली के मंत्रोचार के साथ अर्पित किये गए। महाशिवरात्रि के इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा किए गए शिव अनुष्ठान से संपूर्ण वेदपीठ परिसर शिवमय हो गया।

शिव स्वरूप में ठाकुर जी का श्रृंगार एवं छप्पनभोग की झांकी ने मन मोहा

कल्लाजी वेदपीठ पर विराजित ठाकुर श्री कल्लाजी का महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिव स्वरूप में किया गया श्रृंगार एवं पंचदेवों को न्यौछावर की गई छप्पनभोग की झांकी भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। श्रृंगार आरती से लेकर भोर होने तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। हर कोई भक्त अपने आराध्य के शिव स्वरूप को देखकर चकित होते हुए स्वयं को धन्य कर रहा था। शिव महा आरती के पश्चात भक्तों को महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस मौके पर पिछले डेढ दशक से शिव अनुष्ठान में भागीदारी निभाने वाले भक्तों का सम्मान किया गया।

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