खदानों के जल से सिंचाई योजना को लेकर विधायक कृपलानी का स्थलीय निरीक्षण

निम्बाहेड़ा। खदानों में संचित प्राकृतिक जल को कृषि सिंचाई में उपयोग करने की स्वीकृत महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने की दिशा में मंगलवार को पूर्व यूडीएच मंत्री एवं विधायक श्रीचंद कृपलानी ने योजना क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। विधायक कृपलानी ने टाटरमाला, सालरमाला एवं बडौली माधोसिंह क्षेत्र में स्थित पत्थर खदानों का अवलोकन कर जल संग्रहण की स्थिति, खदानों की भौगोलिक संरचना तथा प्रस्तावित स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के संभावित बिंदुओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान विधायक कृपलानी ने सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता प्रहलाद जाट को योजना के शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि डीएमएफटी से स्वीकृत राशि का सदुपयोग करते हुए कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि तकनीकी सर्वे, पाइपलाइन लेआउट, मोटर स्थापना एवं संरचनात्मक कार्य तय समय-सीमा में प्रारंभ किए जाएं, ताकि किसानों को शीघ्र लाभ मिल सके।
विधायक कृपलानी ने कहा कि यह योजना केवल सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि निम्बाहेड़ा क्षेत्र के जल प्रबंधन और कृषि भविष्य की दिशा तय करने वाला मॉडल है। खदानों में वर्षों से व्यर्थ पड़े पानी को खेतों तक पहुंचाकर किसानों की आय बढ़ाना और भूजल स्तर में सुधार लाना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।
इस अवसर पर पूर्वी मंडल अध्यक्ष अशोक जाट, पश्चिम मंडल अध्यक्ष राजेंद्र सिंह शक्तावत, पत्थर खदान व्यवसाय से जुड़े सुरेन्द्र डूंगरवाल, कैलाश दुबे, राधेश्याम जोशी, पितराज चारण, मोतीदान चारण, बद्रीदान चारण, सरपंच प्रतिनिधि गणेशदान चारण, पूर्व उपसरपंच धनश्याम सिंह, आशाराम माली, प्रभुदान चारण, पुखराज चपलोत, हीरालाल आचारत, रामचंद्र खटीक, श्यामलाल जटिया, प्रहलाद चारण, भगीरथ चारण सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण एवं खदान व्यवसायी मौजूद रहे। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने योजना को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताते हुए विधायक कृपलानी का आभार व्यक्त किया।
निरीक्षण के बाद क्षेत्रवासियों में उत्साह का माहौल रहा। किसानों का कहना है कि योजना के लागू होने से सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलेगी, फसल उत्पादन बढ़ेगा और क्षेत्र आर्थिक रूप से सशक्त होगा। वहीं खदानों के जल के सदुपयोग से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और निम्बाहेड़ा क्षेत्र जल आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से अग्रसर होगा।
