मां भगवती अपने भक्तों की सदा रक्षा करती है- पं. शास्त्री

मां भगवती अपने भक्तों की सदा रक्षा करती है- पं. शास्त्री

निम्बाहेड़ा।

नगर की आदर्श कॉलोनी स्थित श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर के षष्टम पाटोत्स के अवसर पर आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन मध्यप्रदेश रतलाम के प्रसिद्ध कथा वाचक पं. श्री मृदुलकृष्ण जी शास्त्री ने महिषासुर जन्म से लेकर उसके वध तथा देवी मां काली, देवी मां महालक्ष्मी एवं मां सरस्वती के प्राकट्य की कथा का वर्णन किया।

व्यासपीठ से कथा का वाचन करते हुए पं. श्री शास्त्री ने नवरात्रा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि नवरात्र पर देवी के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। सच्चे मन से पूजा-अर्चना और व्रत रखने से देवी प्रसन्न होती है। सभी मनोकामनाओं को पूरा करती है। उन्होने कथा के दौरान मां की महिमा बताते हुए कहा कि पुत्र कुपुत्र हो सकता है, लेकिन माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती है। मां भगवती अपने भक्तों की सदा रक्षा करती है।

उन्होंने कहा कि सभी को सत्संग में जाना चाहिए, संतों का साथ करना चाहिए। सनातन धर्म की रक्षा के लिए सभी को आगे आना चाहिए। उन्होंने सतानती संस्कृति के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए कहा कि प्रभु भक्ति से ही मोक्ष प्राप्ति संभव है।

संगीतमय कथा वाचन के दौरान कथा पांडाल में उपस्थित सैंकडों श्रद्धालु भक्त भाव विभोर होकर नृत्य करने लगे।

कथा आरम्भ होने से पूर्व कथा आयोजक एडवोकेट श्याम पुष्पा शर्मा ने व्यासपीठ पर विराजीत कथा वाचक पंडित श्री मृदुल कृष्ण जी शास्त्री का मंगल तिलक लगाकर एवं उपरना ओढ़ाकर अभिनन्दन किया तत्पश्चात व्यास पीठ पर श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा ग्रंथ की पूजा अर्चना की।

गुरूवार को आयोजित कथा के चौथे दिन जिला परिषद चित्तौडग़ढ़ के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी राकेश कुमार पुरोहित ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ लिया। इस अवसर पर उन्होने कथा पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर उनके भाव को अपने अंत:र्मन में उतारकर अपने जीवन को सार्थक बनाने का आग्रह किया।

कथा के अंत में महाआरती के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया।

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