विश्व जल संरक्षण दिवस पर नीलबाव में किया श्रमदान

चित्तौड़गढ़ । विश्व जल संरक्षण दिवस के अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक निधि परिषद, इंटेक् एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की जन सहभागिता से विश्व विरासत दुर्ग पर स्थित नील बाव कुंड में जलकुंभी हटाने का अभियान प्रारंभ किया गया| मीठे पानी के स्रोत को विकसित करने एवं संरक्षण को लेकर बड़ी संख्या में इंटेक् सदस्य ,पुरातत्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों सहित स्थानीय युवाओं की जलकुंभी हटाने में सहभागिता रही| सभी ने अपने सामूहिक प्रयास के द्वारा सवेरे 8:00 से बजे यह कार्य प्रारंभ हुआ दो घंटे चले। इस श्रमदान में ढेर सारी जलकुंभी को बाहर निकाला गया ।
इस अवसर पर सहसंयोजक मनीष मालीवाल ने बताया कि यह अभियान तीन दिन तक चलेगा जिसमें समूचे नील बाव कुंड की सफाई की जाएगी| प्रतिदिन सुबह 7:00 से 9:00 तक इंटेक् सदस्य एवं स्थानीय निवासियों की जन सहभागिता से एवं उसके बाद कुशल श्रमिकों के द्वारा इस जलकुंभी को बाहर निकाला जाएगा| इस मीठे पानी के जल स्रोत के बारे में जानकारी देते हुए इंटेक जिला संयोजक डॉ.सुशीला लड्ढा ने ने बताया कि नील बाव कुंड जो की दुर्ग का एक प्राचीन कुंड है इसके जल का टीडीएस 181 आया जो की उत्तम जल श्रेणी के अंतर्गत आता है | इंटेक् सदस्य डॉ.गोपाल सालवी ने बताया कि इस अवसर पर भारत के जल पुरुष और रमन मैगसेसे पुरस्कार प्राप्त राजेंद्र सिंह ऑनलाइन के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े और उन्होंने विश्व जल संरक्षण दिवस के अवसर पर चित्तौड़ दुर्ग के नीलबाव में जल संरक्षण के इस श्रमदान को प्रोत्साहन देते हुए कहा कि हम सभी को इस प्रकार के जल स्रोत को विकसित करना चाहिए ताकि भावी पीढ़ी को जल संरक्षण के बारे में पता चल सके| जलकुंभी हटाओ अभियान में श्रमदान में सहभागिता करने वाले डॉ. कुंदन जैन, राकेश कुमार मंत्री, शांतिलाल भराडि़या, भरत महेश्वरी,विजय कुमार अजमेरा, बनवारी लाल सोनी मनीष महंत, राकेश जेथलिया, गौरव बोकाडिया, एवं स्थानीय निवासी पवन बैरागी आदि मौजूद रहे।
