चित्तौड़गढ़ में पॉलिथीन मुक्त अभियान को मिली रफ्तार, जिला कलेक्टर को सौंपे गए 15000 कपड़े के बैग


चित्तौड़गढ़, । चित्तौड़गढ़ जिले को ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ और पॉलिथीन से मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक अभिनव एवं प्रभावी अभियान प्रारंभ किया गया है। इसी क्रम में राजस्थान परमाणु बिजलीघर (RAPS) की ‘अनुशीला’ परियोजना द्वारा तैयार किए गए 15,000 कपड़ों के बैगों की प्रथम खेप आज जिला प्रशासन को सौंपी गई। यह परियोजना कुल 40,000 कपड़ों के बैग उपलब्ध कराएगी।

जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने बैग प्राप्त करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ को प्लास्टिक-मुक्त और टूरिस्ट-फ्रेंडली जिला बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पॉलिथीन के स्थान पर कपड़े के थैलों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जनभागीदारी को भी बढ़ाएगा। उन्होंने शेष 25,000 बैग शीघ्र प्राप्त होने की उम्मीद भी जताई।

कलेक्टर ने आमजन से अपील की कि वे बाजार जाते समय पॉलिथीन के बजाय कपड़ों के थैलों का उपयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुंदर और हरित चित्तौड़गढ़ दिया जा सके।

महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल

राजस्थान परमाणु बिजलीघर के स्थल निदेशक एवं सीएसआर-एसडी समिति के चेयरमैन दासरी सुब्बा राव ने बताया कि यह पहल स्वच्छता पखवाड़े के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने हेतु की गई है। रावतभाटा क्षेत्र के ‘अणुसिमरन’ स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित ये बैग जिलेभर में वितरित किए जाएंगे।

सीएसआर एवं एसडी समिति के सदस्य सचिव संजय कांडपाल ने कहा कि यह परियोजना स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार का मजबूत आधार बन रही है।

‘अणुसिलाई केंद्र’ के माध्यम से प्रशिक्षित महिलाएं इन बैगों का निर्माण कर रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि इस बड़े ऑर्डर से महिलाओं के सिलाई कौशल में निरंतर निखार आ रहा है और वे भविष्य में अपना स्वयं का लघु उद्योग भी स्थापित कर सकेंगी।

पर्यावरण के साथ आत्मनिर्भरता की ओर

घर की चारदीवारी से निकलकर व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ रही ये महिलाएं अब केवल अपने परिवारों की ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के भविष्य की संरक्षक बन रही हैं।

इस अवसर पर उपखंड अधिकारी डॉ कृति व्यास और तहसीलदार विवेक गरासिया सहित अणुसिमरन केंद्र की महिलाएं उपस्थित रहीं।

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