राजस्थान सरकार का बजट 'खोखले वादों का पुलिंदा' और 'जनता के साथ छलावा' : आंजना

निम्बाहेड़ा| पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा आज विधानसभा में पेश किया गया वार्षिक बजट पूरी तरह से दिशाहीन और निराशाजनक है। यह बजट धरातल की सच्चाई से दूर, केवल आंकड़ों की बाजीगरी और चुनावी घोषणाओं का एक पिटारा मात्र है, जिसमें आम आदमी के लिए कुछ भी ठोस नहीं है। आंजना ने कहां की बढ़ता कर्ज और वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से सरकार राज्य को कर्ज के दलदल में धकेल रही है। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए बजट में कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। बिना आय के स्रोतों पर ध्यान दिए की गई घोषणाएं केवल आर्थिक अस्थिरता को बढ़ाएंगी।
बेरोजगारों के साथ मजाक एवं महंगाई रोकने में असमर्थ बजट : आंजना ने कहां की प्रदेश का युवा रोजगार की उम्मीद लगाए बैठा था, लेकिन सरकार ने नई भर्तियों के नाम पर केवल पुरानी योजनाओं को नया नाम दिया है। निजी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने और कौशल विकास के लिए कोई ठोस नीति नहीं दिखी। साथ ही पेट्रोल-डीजल पर वैट (VAT) कम करने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने को लेकर बजट पूरी तरह मौन है। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों को महंगाई से कोई राहत नहीं दी गई है।
किसानों की अनदेखी सहित बुनियादी ढांचे को सशक्त करने को लेकर सरकार दिशाहीन : आंजना ने कहां की कृषि बजट के नाम पर केवल लोकलुभावन बातें की गई हैं। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने या कर्ज माफी के मुद्दे पर सरकार ने एक बार फिर किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में केवल नई इमारतों की घोषणा की गई है, जबकि पहले से मौजूद केंद्रों में डॉक्टरों, शिक्षकों और संसाधनों की भारी कमी को दूर करने के लिए कोई बजट आवंटित नहीं किया गया।
निम्बाहेड़ा विधानसभा एवं चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ जिले को नहीं मिली आशानुरूप सौगात : आंजना ने कहां की निम्बाहेड़ा विधानसभा सहित चित्तौड़गढ़ एवं प्रतापगढ़ जिले कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं कर सके, जिस वजह से क्षेत्र की जनता में भारी निराशा है एवं इस दिशाहीन बजट के बाद प्रदेश, जिले एवं विधानसभा की जनता पुनः कांग्रेस के राज को याद करने लगी है जब बजट में प्रत्येक जिले एवं विधानसभा को उचित प्रतिनिधित्व मिलता था एवं जनता की आशा अनुरूप विकास कार्यों की सौगाते बजट के माध्यम से क्षेत्र को मिलती थी। लेकिन सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों के आपसी झगड़ों में लगे रहने, विधानसभा में बार-बार खड़े होकर केवल मीडिया में खुद को जीवित रखने का प्रयास करने एवं विधायकों के जन समस्याओं को दूर करने की जगह अपने व्यापारिक हितों की सिद्धि हेतु कार्य करने की वजह से हमें बजट में विशेष स्थान नहीं मिला है जिससे क्षेत्र की जनता क्षुब्ध है।
आंजना ने कहा कि जनता जानती है कि राजस्थान सरकार पिछले 2 बजट में अपने द्वारा की गई घोषणाओं में से 30% घोषणाओं को भी पूरी नहीं कर पाई है। अब सरकार 1 बजट और लेकर आई है परंतु यह बजट भी सरकार में विजन एवं नेतृत्व की कमी को दर्शाता है। यह राजस्थान के विकास का नहीं, बल्कि केवल भाजपा के प्रचार का बजट है।
