सफलता की कहानी फार्म पोंड से बदली किस्मत, पारस बाई के खेत में आई खुशहाली

चित्तौड़गढ़ । राज्य सरकार की जल संरक्षण एवं कृषक हितैषी योजनाएं ग्रामीण अंचलों में किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। चित्तौड़गढ़ जिले की कपासन तहसील की महिला कृषक पारस बाई जाट की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहां फार्म पोंड (खेत तलाई) योजना ने खेती की दिशा और दशा दोनों बदल दी।
पानी की कमी बनी थी खेती की सबसे बड़ी चुनौती
कपासन क्षेत्र के रूपाखेड़ी गांव की कृषक पारस बाई जाट के पास खेती योग्य भूमि तो उपलब्ध थी, लेकिन सिंचाई के सीमित संसाधनों के कारण खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था। परिणामस्वरूप वे केवल एक ही फसल ले पाती थीं और उत्पादन भी सीमित रहता था।
सरकारी योजना से मिली नई उम्मीद
कृषि विभाग कपासन के अधिकारियों एवं कृषि पर्यवेक्षक द्वारा पारस बाई को फार्म पोंड (खेत तलाई) योजना की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि खेत में तलाई निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण कर सूखे समय में फसलों को सिंचाई उपलब्ध कराई जा सकती है। पारस बाई ने राज किसान साथी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया, जो स्वीकृत होने पर उनके खेत में निर्धारित मापदंड अनुसार फार्म पोंड का निर्माण कराया गया।
अनुदान एवं तकनीकी सहयोग
खेत तलाई का निर्माण पूर्ण होने के पश्चात कृषि विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया। योजना के प्रावधानों के अनुसार देय अनुदान राशि सीधे कृषक के बैंक खाते में हस्तांतरित की गई। साथ ही विभाग द्वारा उन्हें जल का समुचित उपयोग, मत्स्य पालन एवं तलाई के किनारों पर बागवानी जैसी गतिविधियों के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
खेती और आय में आया सकारात्मक बदलाव
फार्म पोंड निर्माण के बाद पारस बाई के खेत और जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिला।
वर्षा जल संचयन अब बारिश का पानी खेत की तलाई में संग्रहित होकर सुरक्षित रहता है।
दोहरी फसल सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से खरीफ के साथ-साथ रबी फसल लेना संभव हुआ।
उत्पादन में वृद्धि समय पर सिंचाई से फसलों की गुणवत्ता एवं पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
जल स्तर में सुधार खेत तलाई के कारण आसपास के कुओं एवं बोरवेल के जल स्तर में भी सुधार दर्ज किया गया।
कृषक की जुबानी
कृषक पारस बाई जाट ने कहा कि “फार्म पोंड मेरे खेत के लिए वरदान साबित हुआ है। पहले खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी, लेकिन अब मेरे पास अपना ‘पानी का बैंक’ है। इस सहयोग के लिए मैं राजस्थान सरकार एवं कृषि विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं।”
यह सफलता कहानी दर्शाती है कि राज्य सरकार की योजनाएं और कृषि विभाग का मार्गदर्शन यदि सही पात्र तक पहुंचे, तो सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
