बड़वाई अकोला-सावा गांव में मक्का उत्पादन बढ़ाने को लेकर प्रशिक्षण आयोजित

चित्तौड़गढ़, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के अंतर्गत भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर), लुधियाना द्वारा संचालित परियोजना “इथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्रों में मक्का उत्पादन में वृद्धि” के तहत जिले के बड़वाई अकोला-सावा गांव में एक दिवसीय मक्का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 115 से अधिक किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान आईआईएमआर के यंग प्रोफेशनल शंकर लाल चौधरी ने बताया कि मक्का अब केवल खाद्य फसल नहीं रह गई है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण औद्योगिक फसल के रूप में उभर रही है।
वर्तमान में देश में लगभग 10 से 12 मिलियन टन मक्का का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में किया जा रहा है, जिसे भविष्य में बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि के साथ देश की जैव-ईंधन नीति को मजबूती मिल सके।
उन्होंने किसानों को उन्नत मक्का उत्पादन तकनीकों, विशेष रूप से उर्वरक प्रबंधन एवं सिंचाई प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा बताया कि मक्का की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ाने में कटाई उपरांत प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
परियोजना प्रबंधक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. एल. जाट ने बताया कि भारत सरकार की इथेनॉल नीति के कारण मक्का की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में देश का मक्का उत्पादन 50 मिलियन टन से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें राजस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मक्का उत्पादन से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा किए एवं विशेषज्ञों से समाधान प्राप्त किया।
