सरदारशहर अस्पताल में मानवता शर्मसार: तड़पती रही मासूम, डॉक्टर मोबाइल में रहे व्यस्त

सरदारशहर। स्थानीय राजकीय उप जिला अस्पताल से लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ कुत्ते के काटने से लहूलुहान एक 3 साल की मासूम बच्ची दर्द से तड़पती रही, लेकिन
परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर इलाज करने के बजाय मोबाइल चलाने में मशगूल रहे।
आधार कार्ड के अभाव में इलाज से इनकार का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को मेलुसर निवासी विजय कस्वा अपनी घायल पुत्री चित्रा को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। बच्ची के गाल पर कुत्ते ने गहरा घाव कर दिया था और वह दर्द से बेहाल थी। पीड़ित पिता ने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर संदीप बिजारणिया ने तुरंत उपचार शुरू करने के बजाय उन्हें इंतजार करने को कहा। हद तो तब हो गई जब डॉक्टर ने इलाज से पहले आधार कार्ड की मांग की और दस्तावेज न होने पर उपचार करने से मना कर दिया। इस कागजी औपचारिकता के चक्कर में मासूम करीब एक घंटे तक बिना इलाज के दर्द से कराहती रही। परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया है।
अस्पताल प्रशासन का सफाई: 'एक्सीडेंट केस में थे व्यस्त'
इस गंभीर लापरवाही पर जब अस्पताल प्रभारी डॉक्टर चंद्रभान जांगिड़ से बात की गई, तो उन्होंने डॉक्टर का बचाव करते हुए कहा कि उस समय अस्पताल में एक अन्य एक्सीडेंट केस आया हुआ था, जिसके कारण डॉक्टर व्यस्त थे। उन्होंने दावा किया कि बाद में बच्ची का उपचार कर दिया गया था। हालांकि, परिजनों के दावों और बनाए गए वीडियो ने अस्पताल प्रबंधन की दलीलों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
इमरजेंसी में इलाज पहले या कागजी कार्रवाई?
यह घटना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यशैली और इमरजेंसी मैनेजमेंट की पोल खोलती है। बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी मरणासन्न या गंभीर रूप से घायल मरीज के लिए आधार कार्ड और दस्तावेज़ उसकी जान से ज्यादा कीमती हैं? नियमतः इमरजेंसी में पहुंचे मरीज को 'गोल्डन ऑवर' में तुरंत प्राथमिक उपचार मिलना चाहिए, जबकि यहाँ व्यवस्थाएं मोबाइल और फाइलों में उलझी नजर आईं।
