राजस्थान DGP राजीव कुमार शर्मा का कड़ा रुख:: भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को फील्ड से दूर, ईमानदारों को प्राथमिकता

भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को फील्ड से दूर, ईमानदारों को प्राथमिकता
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बाड़मेर, : राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार शर्मा ने भ्रष्टाचार करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। मंगलवार को बाड़मेर में जोधपुर रेंज के पुलिस अधीक्षकों की क्राइम मीटिंग के बाद प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि फील्ड पोस्टिंग में अब ईमानदार और मेहनती अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि भ्रष्टाचार या गलत आचरण में लिप्त अधिकारियों को फील्ड से दूर रखा जाएगा। बाड़मेर पहुंचने पर आईजी और एसपी ने गुलदस्ता देकर उनका स्वागत किया। DGP ने पुलिसिंग, महिला-दलित सुरक्षा, नशे की तस्करी, और साइबर ठगी जैसे मुद्दों पर पांच महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नई शुरुआत हैं।

फील्ड पोस्टिंग में ईमानदारों को बढ़ावा

DGP राजीव कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में पारदर्शिता और मेहनत को बढ़ावा देना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, "जो अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं, मेहनती और ईमानदार हैं, उन्हें फील्ड में अहम पदों पर प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं, जिनके खिलाफ तफ्तीश में गड़बड़ी, भ्रष्टाचार, या गलत आचरण की शिकायतें हैं, उन्हें फील्ड पोस्टिंग से दूर रखा जाएगा।" यह बयान राजस्थान पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की ओर इशारा करता है, जो आम जनता के लिए राहत की बात हो सकती है।

बजट और बुनियादी सुविधाओं में कोई कमी नहीं

राजस्थान सरकार की ओर से पुलिस को हरसंभव सहायता मिल रही है, ऐसा DGP का दावा है। उन्होंने बताया, "सीएम भजनलाल शर्मा ने पुलिसिंग के लिए किसी भी चीज से मना नहीं किया। जो भी डिमांड की गई, वो पूरी हुई। पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के जरिए आवास मरम्मत का काम हर साल चल रहा है। जहां आवास की कमी है, वहां सर्वे और निर्माण की प्रक्रिया शुरू है।" इसके अलावा, 10,000 पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी चल रही है, जो पुलिस फोर्स को मजबूत करने में मदद करेगी। DGP ने आश्वासन दिया कि अगर कहीं कमी है, तो प्लान बनाकर उसे पूरा किया जाएगा।

महिला-दलित अत्याचार में कमी, सख्त कार्रवाई का वादा

जोधपुर रेंज की समीक्षा में DGP ने पाया कि महिला और दलितों पर अत्याचार के मामलों में कमी आई है। उन्होंने कहा, "यह सकारात्मक बदलाव है, जिसे बरकरार रखना जरूरी है। दलितों और कमजोर वर्ग पर अत्याचार किसी की हिम्मत न हो, और अगर कोई घटना होती है, तो उस पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में ऐसे अपराध रुकें।" यह कदम सामाजिक न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत संदेश है।

NDPS में नई चुनौती, तस्करी पर शिकंजा

बाड़मेर जैसे बॉर्डर इलाकों में नशे की तस्करी एक बड़ी समस्या है, खासकर जब 100 गांव इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे हैं। DGP ने कहा, "तस्कर नए-नए तरीके अपना रहे हैं, जो पुलिस के लिए चुनौती है। हम संगठित होकर काम करेंगे और मादक पदार्थों से अर्जित तस्करों की संपत्ति को नष्ट करने की योजना पर काम कर रहे हैं।" इंटरनेशनल तस्करी के खिलाफ राष्ट्रीय एजेंसियों और एनसीबी के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है ताकि बाड़मेर रेंज और पूरे राज्य में ड्रग्स माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

साइबर ठगी पर निगरानी बढ़ी

साइबर ठगी के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए DGP ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी जिलों में साइबर थाने स्थापित किए हैं। प्रदेश मुख्यालय में मॉनिटरिंग सिस्टम मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा, "देशभर के साइबर अपराधों को इंटरलिंक कर नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। हर जिले में साइबर थाना प्रभावी हो, और छोटी से छोटी ठगी की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो, इसके लिए व्यवस्था बढ़ाई जा रही है।" स्टाफ और टेक्निकल टूल्स की कमी को फेज में पूरा किया जा रहा है, साथ ही जन जागरूकता और थानों में एक्सपर्ट की नियुक्ति पर जोर है।

DGP का यह कड़ा रुख और व्यापक रणनीति राजस्थान पुलिस को भ्रष्टाचारमुक्त, तकनीकी रूप से सक्षम, और जन-हितैषी बनाने की दिशा में एक नई शुरुआत है। बाड़मेर से शुरू यह पहल पूरे राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का संकेत देती है।

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