राजस्थान उच्च न्यायालय ने नदी से बजरी खनन में रिप्लेनिशमेंट स्टडी अनिवार्य करने के निर्देश दिए

जयपुर। राजस्थान में नदियों में हो रहे अंधाधुंध बजरी खनन पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में नदी से बजरी निकालने की अनुमति देने से पहले रिप्लेनिशमेंट स्टडी प्रक्रिया का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने कहा कि जिस तरह जंगलों को बचाने के लिए पेड़ों की कटाई से पहले उनकी ग्रोथ रेट मापना जरूरी है, उसी तरह नदियों का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है ताकि रेत की भरपाई किस रफ्तार से हो रही है, इसका पता लगाया जा सके। कोर्ट ने स्वीकार किया कि निर्माण कार्यों के लिए रेत एक आवश्यक संसाधन है और इस पर पूरी तरह बैन लगाना व्यावहारिक नहीं है।
नीलामी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की सीईसी रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि भविष्य में होने वाली नीलामी इसी रिपोर्ट के मानदंडों के अनुसार होगी। इसके तहत पूरे लीज एरिया को 5 सालाना ब्लॉक में बांटना होगा। एक साल में केवल एक ब्लॉक से ही बजरी निकाली जा सकेगी, जबकि बाकी चार ब्लॉक अगले चार वर्षों के लिए खाली छोड़ दिए जाएंगे ताकि प्राकृतिक रूप से बजरी जमा हो सके। यह नियम 100 हेक्टेयर से कम के छोटे प्लॉट पर भी लागू होगा।
