बड़ा फैसला:: नगर पालिका परिसीमन के लिए नई जनगणना अनिवार्य नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

नगर पालिका परिसीमन के लिए नई जनगणना अनिवार्य नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
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जोधपुर । राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नगर पालिका चुनावों और वार्ड परिसीमन को लेकर एक महत्वपूर्ण 'रिपोर्टेबल' फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 10 के तहत वार्डों की भौगोलिक सीमाएं तय करने के लिए नई जनगणना का होना कोई अनिवार्य शर्त नहीं है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने बीकानेर की नोखा नगर पालिका के वार्ड पुनर्गठन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी है।

यह मामला बीकानेर के नोखा की राजनीतिक पार्टी 'विकास मंच' के अध्यक्ष ललित किशोर झंवर और सुखाराम भादू द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बिना नई जनगणना के परिसीमन करना पूरी तरह मनमाना है और यह अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी व महिलाओं के आरक्षण मैट्रिक्स (जनसंख्या अनुपात) और रोटेशन तंत्र का उल्लंघन करता है। उन्होंने विभिन्न कानूनी फैसलों का हवाला देते हुए मांग की थी कि चुनाव अधिसूचना से पहले कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।

खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह माना कि कानून के तहत जनगणना की प्रतीक्षा करना परिसीमन के लिए बाध्यकारी नहीं है। गौरतलब है कि नोखा में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 2019-20 में परिसीमन हुआ था, जिससे वार्डों की संख्या 35 से बढ़कर 45 हो गई थी। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2025 में जारी नई अधिसूचना और दिशा-निर्देशों को अब कोर्ट ने सही ठहराया है। इस फैसले के बाद प्रदेश की कई नगर पालिकाओं में आगामी चुनावों और परिसीमन का रास्ता साफ हो गया है।

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