पुरानी दोस्ती: जब बकरियां चराते मित्र को देख मंत्री दिलावर ने रुकवाया काफिला, याद आए सब्जी बेचने के दिन

पुरानी दोस्ती: जब बकरियां चराते मित्र को देख मंत्री दिलावर ने रुकवाया काफिला, याद आए सब्जी बेचने के दिन
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बारां (हलचल)। राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर का सोमवार को एक बेहद मानवीय और भावुक रूप देखने को मिला। बारां जिला मुख्यालय से छैलाबेल गांव जाते समय मंत्री ने रास्ते में बकरियां चरा रहे अपने बचपन के मित्र को देख न केवल अपना काफिला रुकवाया, बल्कि उसे गले लगाकर पुरानी यादें भी ताजा कीं।

"कैसे हो दोस्त" - मंत्री की सादगी ने जीता दिल

रास्ते में बकरियां लेकर जा रहे एक व्यक्ति को देख मंत्री दिलावर ने अचानक गाड़ी रुकवाई और नीचे उतरकर बोले— "कैसे हो दोस्त!" वह व्यक्ति कोई और नहीं, उनके बचपन के मित्र हरीशचंद्र सुमन थे। मंत्री को अपने सामने देख हरीशचंद्र की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

सिर पर टोकरी रख बेची थी सब्जी

दोनों मित्रों ने मुलाकात के दौरान अपने संघर्ष के दिनों को भावुकता से याद किया। मंत्री दिलावर ने बताया कि:

वे और हरीशचंद्र सुमन बचपन के साथी हैं और दोनों की उम्र लगभग समान है।

एक दौर था जब दोनों मित्र सिर पर टोकरी रखकर गांव-गांव आवाज लगाते हुए हरी सब्जियां बेचा करते थे।

मंत्री ने मुस्कराते हुए अपने मित्र से पूछा— "तुम्हें याद है हम क्या-क्या बेचते थे?" जिस पर हरीश ने भी पुराने दिनों की यादें साझा कीं।

इस मुलाकात ने साबित कर दिया कि पद और प्रतिष्ठा कितनी भी बड़ी हो जाए, पर पुराने संघर्ष के साथी और बचपन की यादें हमेशा दिल के करीब रहती हैं।

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