लुई ब्रेल जयंती के उपलक्ष पर दृष्टिबाधितों का किया सम्मान

चित्तौड़गढ़| में ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल का जन्म दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। यह आयोजन समग्र शिक्षा चित्तौड़गढ़ की समावेशी शिक्षा इकाई और दृष्टिहीन क्रीड़ा परिषद अजमेर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। दृष्टिहीन क्रीड़ा परिषद अजमेर के संयुक्त सचिव लक्ष्मी लाल स्वर्णकार ने बताया कि यह कार्यक्रम हेमेन्द्र कुमार सोनी, संदर्भ व्यक्ति सीडब्ल्यूएसएन की नवाचारी पहल के अंतर्गत आयोजित हुआ, जिसमें दोनों संस्थाओं को जोड़ते हुए दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के सम्मान का उद्देश्य रखा गया।
कार्यक्रम राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड जिला मुख्यालय चित्तौड़गढ़ द्वारा आयोजित सेवापूर्व शिक्षकों के आवासीय शिविर के दौरान संपन्न हुआ। चित्तौड़गढ़ में इस तरह का यह दूसरा प्रयास बताया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा मुख्यालय चित्तौड़गढ़ एवं अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा राजेन्द्र कुमार शर्मा रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में सीओ स्काउट चन्द्र शंकर श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत लुई ब्रेल के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद लक्ष्मी लाल स्वर्णकार ने स्वागत उद्बोधन देते हुए लुई ब्रेल के जीवन, उनके संघर्ष और ब्रेल लिपि के आविष्कार पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर ब्रेल लिपि को लेकर एक संगोष्ठी भी आयोजित की गई, जिसमें शिविरार्थी, प्रशिक्षक सत्यनारायण शर्मा तथा बालिका हरीप्रिया गौड ने लुई ब्रेल के जीवन पर पत्र वाचन और विचार प्रस्तुत किए।
सम्मान समारोह से पूर्व उपस्थित सेवापूर्व शिक्षकों को लुई ब्रेल के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी दी गई। इसमें उनके जन्म 4 जनवरी 1809, एक दुर्घटना में आंखों के घायल होने, धीरे-धीरे दृष्टि समाप्त होने, शिक्षा ग्रहण करने और अंततः ब्रेल लिपि के आविष्कार तक की यात्रा साझा की गई। साथ ही समग्र शिक्षा के अंतर्गत दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर द्वारा किए गए प्रावधानों की भी जानकारी दी गई।
जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र कुमार शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए। तभी उनके शैक्षिक और सामाजिक पुनर्वास के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि लुई ब्रेल जयंती पर दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को सम्मानित करना समाज के लिए एक प्रेरणादायक और सकारात्मक संदेश है।
कार्यक्रम के अंत में राजकीय विद्यालयों में अध्ययन कर व्यावसायिक पाठ्यक्रम, बीएसटीसी और बीएड पूर्ण करने वाले सफल दृष्टिबाधित विद्यार्थियों नन्द लाल लौहार, मुकेश जाट, सोनु मेधवाल, कृष्ण पंचोली, देवी लाल और कन्हैया लाल सहित राजकीय सेवा में चयनित दृष्टि दिव्यांग नन्दकिशोर और दिनेश रावत को मेवाड़ी पाग, शॉल, उपरणा, श्रीफल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सम्मानित दृष्टि दिव्यांगों ने अपने जीवन संघर्ष और सफलता की यात्रा साझा करते हुए शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यालयों में आने वाले प्रत्येक दिव्यांग विद्यार्थी के साथ पूर्ण समर्पण से कार्य करें, ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास संभव हो सके और एक समावेशी समाज की कल्पना साकार हो।
कार्यक्रम का संचालन हेमेन्द्र कुमार सोनी ने किया, स्वागत उद्बोधन एडल्ट लीडर ट्रेनर एवं शिविर संचालक चतर सिंह राजपूत ने दिया तथा आभार सत्यनारायण सोमानी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर कई प्रशिक्षक, स्काउट गाइड सदस्य, शिक्षक, सम्मानित विद्यार्थियों के परिजन और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
