उप मुख्यमंत्री डॉ बैरवा ने चारभुजा–गढ़बोर में रात्रि चौपाल को किया संबोधित

उप मुख्यमंत्री डॉ बैरवा ने चारभुजा–गढ़बोर में रात्रि चौपाल को किया संबोधित
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राजसमंद । उप मुख्यमंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने सोमवार शाम कुंभलगढ़ उपखंड के ग्राम चारभुजा–गढ़बोर में आयोजित रात्रि चौपाल को संबोधित करते हुए विकसित भारत–रोज़गार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025, जिसे संक्षेप में वी.बी.जी. राम जी कहा जा रहा है, के नवीन प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हर क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति कर रहा है और आज का भारत नया भारत बन चुका है।

इस दौरान कुंभलगढ़ विधायक एवं पूर्व मंत्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़, जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा, एडीएम नरेश बुनकर, जिला परिषद सीईओ बृजमोहन बैरवा, एसडीएम साक्षी पूरी आदि मंच पर मौजूद रहे।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर चुका है। वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम लागू किया गया था। उस समय ग्रामीण भारत की आवश्यकताएँ अलग थीं। योजना की अवधारणा सही हो सकती थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन में व्यापक स्तर पर अनियमितताएँ और भ्रष्टाचार देखने को मिला। फर्जी नामों से मस्टररोल भरकर भुगतान उठाया गया और गरीबों के नाम पर आवंटित बजट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। बदली हुई परिस्थितियों में इस कानून को नए स्वरूप में ढालना आवश्यक हो गया था।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि देश और गांवों की बदली हुई सामाजिक-आर्थिक स्थिति को देखते हुए मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत–रोज़गार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 लागू किया गया है। यह केवल एक नया कानून नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के भविष्य की गारंटी है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को इस योजना का नाम भी स्वीकार नहीं हो पा रहा है, जबकि राम नाम देश की आत्मा और संस्कृति में रचा-बसा है।

इस अवसर पर कुंभलगढ़ विधायक ने सभी क्षेत्रवासियों को नवीन पंचायत समिति की बधाई दी और कहा कि भविष्य में चारभुजा क्षेत्र में और अधिक गति से विकास सुनिश्चित होगा।

डिजिटल युग के अनुरूप ग्रामीण रोज़गार

उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण आजीविका विविध हो चुकी हैं। किसान अपने मोबाइल पर ही देशभर के बाज़ारों की मांग और आपूर्ति की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। श्रमिक और कामगार भी मोबाइल के माध्यम से रोज़गार तलाश रहे हैं। मनरेगा की पुरानी संरचना आज के गांवों की वास्तविकताओं से मेल नहीं खा रही थी, इसी कारण नए कानून की आवश्यकता महसूस की गई।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा लोकसभा में वी.बी.जी. राम जी विधेयक प्रस्तुत किया गया और 21 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ यह कानून बन गया।

125 दिनों के रोज़गार की वैधानिक गारंटी

इस अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष न्यूनतम 125 दिनों के मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी दी गई है, जबकि पहले यह सीमा 100 दिन थी। इसमें 25 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और उन्हें रोज़गार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा। राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए यह प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

खेती के मौसम में लचीलापन

अधिनियम के तहत राज्यों को यह अधिकार दिया गया है कि फसल की बुवाई और कटाई के समय अधिकतम 60 दिनों तक योजना में अस्थायी विराम किया जा सके। इससे खेतों में श्रमिकों की उपलब्धता बनी रहेगी और 125 दिनों का रोज़गार अधिकार भी सुरक्षित रहेगा।

समय पर भुगतान और मुआवज़े का है प्रावधान

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों को साप्ताहिक आधार पर या किसी भी स्थिति में 15 दिनों के भीतर मज़दूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। यदि भुगतान में देरी होती है तो श्रमिक को मुआवज़ा देना अनिवार्य होगा। यह प्रावधान श्रमिक की गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा करता है।

गांवों में स्थायी विकास कार्य

वी.बी.जी. राम जी के तहत गांवों में जल सुरक्षा, जल संरक्षण, सड़क निर्माण और जलवायु परिवर्तन से बचाव से जुड़े स्थायी विकास कार्य किए जा सकेंगे। इन कार्यों का प्रस्ताव और निर्धारण गांव स्तर पर होगा, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन संभव होगा।

ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की केंद्रीय भूमिका

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून पंचायतों के अधिकार कम नहीं करता, बल्कि उन्हें और सशक्त बनाता है। योजना निर्माण की प्रक्रिया ग्राम पंचायत से शुरू होगी और ग्राम सभा की सहभागिता अनिवार्य होगी। पंचायतों, कार्यक्रम अधिकारियों और जिला प्राधिकरणों को इस अधिनियम में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। यह एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसमें सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य वित्तीय अनुपात 60:40 रहेगा। पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 तथा कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100 प्रतिशत केंद्र वित्तपोषण का प्रावधान है।

पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक

अधिनियम में रोज़गार आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह नियम-आधारित और पारदर्शी होगी। बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से श्रमिक की पहचान सुनिश्चित की जाएगी, जिससे फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। ग्राम सभा द्वारा सामाजिक लेखा परीक्षा भी की जाएगी। यदि किसी पात्र व्यक्ति को निर्धारित समय में काम नहीं मिलता है तो 15 दिन बाद उसे बेरोज़गारी भत्ता देना अनिवार्य होगा।

ग्रामीण भारत के लिए तीन गारंटियाँ

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वी.बी. राम अधिनियम 2025 ग्रामीण भारत के लिए आय की गारंटी, सम्मान की गारंटी और भविष्य की गारंटी है। यह कानून ग्रामीण रोज़गार के सशक्तिकरण, समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मज़बूत माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार इस अधिनियम को पूर्ण प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और जन-भागीदारी के साथ लागू करेगी। सभी से आह्वान किया गया कि मिलकर समृद्ध, सक्षम और आत्मनिर्भर ग्रामीण राजस्थान का निर्माण करें।

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