जल उपयोक्ता संगमों एवं काश्तकारों से जल संसाधन प्रबंधन व सिंचाई व्यवस्था पर विस्तृत संवाद


राजसमंद। जल उपयोक्ता संगमों एवं काश्तकारों के साथ संवाद कार्यक्रम जल संसाधन खण्ड में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण तथा कृषकों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझकर उनके समाधान हेतु आपसी संवाद स्थापित करना रहा।

एक्सईएन मान सिंह मीणा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान जल संसाधन खण्ड के अधीनस्थ बांधों एवं नहरों की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा बांधों, नहरों तथा वितरण प्रणालियों में आवश्यक मरम्मत एवं रख-रखाव कार्यों की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। फसल सिंचाई हेतु जल उपलब्धता, जल वितरण में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों तथा जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए प्राथमिकताओं के निर्धारण पर भी चर्चा हुई, जिससे सिंचाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जा सके।

संवाद के दौरान उन्नत एवं जल-संरक्षण आधारित सिंचाई प्रणालियों के उपयोग पर विशेष बल दिया गया। काश्तकारों को सूक्ष्म सिंचाई, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी प्रेशर आधारित सिंचाई प्रणालियों के लाभों से अवगत कराया गया तथा इन प्रणालियों के माध्यम से कम जल में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाकर जल की बचत के साथ-साथ कृषि लागत में भी कमी लाई जा सकती है, जिससे कृषकों की आय में वृद्धि संभव है।

कार्यक्रम में उन्नत कृषि तकनीकों, कम जल खपत वाली फसलों, वैकल्पिक एवं नकदी फसलों की खेती पर भी व्यापक चर्चा हुई। WUA सदस्यों ने जानकारी दी कि उनके स्तर पर यथासंभव उन्नत तकनीकों को अपनाया जा रहा है। पॉली हाउस, नेट हाउस एवं आधुनिक कृषि संरचनाओं के उपयोग से जल संरक्षण एवं उत्पादन वृद्धि के लाभों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही पॉली हाउस, पाइपलाइन एवं अन्य कृषि सामग्री पर मिलने वाले सरकारी अनुदानों में कमी की जानकारी देते हुए इसमें वृद्धि किए जाने की आवश्यकता भी व्यक्त की गई।

सिंचाई शुल्क वसूली को सुदृढ़ बनाने पर भी संवाद कार्यक्रम में विशेष ध्यान दिया गया। उपयोक्ता संगमों द्वारा सिंचाई शुल्क वसूली के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया गया कि शुल्क की समय पर वसूली से सिंचाई प्रणालियों के संचालन एवं रख-रखाव में सहायता मिलती है। इस दौरान संगमों द्वारा वसूली के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं, कृषकों की आर्थिक स्थिति तथा राजस्व वसूली के लिए प्रशिक्षित एवं कुशल कार्मिकों की आवश्यकता का मुद्दा भी उठाया गया।

कृषि उत्पादों से संबंधित व्यवस्था एवं प्रसंस्करण सुविधाओं पर चर्चा करते हुए कृषकों को कृषि कार्यों में प्रयुक्त आधुनिक उपकरणों की खरीद, उपलब्धता एवं उपयोग के बारे में जानकारी दी गई। कृषकों द्वारा इन उपकरणों की खरीद पर सरकार द्वारा दी जा रही सहायता एवं अनुदान बढ़ाने की मांग रखी गई। इसके साथ ही कृषि उत्पादों की प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, मूल्य संवर्धन एवं किसानों की आय बढ़ाने के लाभों से कृषकों एवं सदस्यों को अवगत कराया गया।

कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की प्रभावी भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया। कृषि एवं जल प्रबंधन से संबंधित निर्णयों में महिलाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए प्रत्येक जल उपयोक्ता संगम में महिला सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने तथा महिला दलों के गठन हेतु प्रेरित किया गया। अंत में उपस्थित कृषकों एवं उपयोक्ता संगमों के सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों का स्वागत करते हुए विभाग द्वारा आवश्यक कार्यवाही किए जाने का आश्वासन दिया गया।

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