बीलिया में रावण के दंभ चूर्ण के साथ तीन दिवसीय हनुमान कथा का समापन

बीलिया में रावण के दंभ चूर्ण के साथ तीन दिवसीय हनुमान कथा का समापन
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शाहपुरा(किशन वैष्णव)र्म की नगरी बीलिया में विगत बारह वर्षों से प्रत्येक मंगलवार को अखंड रूप से हनुमान चालीसा के पाँच पाठ की परंपरा तथा अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के वार्षिकोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय हनुमान कथा एवं विविध धार्मिक आयोजनों का रविवार को भावपूर्ण एवं भव्य समापन हुआ। समूचा ग्राम क्षेत्र इन तीन दिनों तक राम नाम और हनुमान भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

कथा प्रवक्ता महंत राम झूलन दास महाराज ने प्रथम दिवस हनुमान जी के अवतार प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए माता अंजना को प्राप्त श्राप और उसके वरदान में परिणत होने की दिव्य कथा सुनाई। महाराज ने बताया कि किस प्रकार हनुमान जी का जन्म धर्म की रक्षा, अधर्म के विनाश और प्रभु श्रीराम की सेवा हेतु हुआ। कथा के दौरान श्रोता पूरी तरह भाव-विभोर नजर आए।

द्वितीय दिवस रात्रिकालीन कथा में महाराज ने हनुमान चालीसा के प्रत्येक चौपाई के भावार्थ को सरल भाषा में समझाते हुए हनुमान जी की लीलाओं का सजीव वर्णन किया। भक्तों ने संगीतमय भजनों के साथ कथा श्रवण किया, जिससे वातावरण भक्तिमय बन गया।

तृतीय एवं अंतिम दिवस की कथा में जामवंत–हनुमान संवाद, अशोक वाटिका की लीला, लंका दहन, सुग्रीव मिलन, राम सेतु निर्माण तथा प्रभु श्रीराम द्वारा रावण के दंभ के चूर्णन का अत्यंत प्रभावशाली वर्णन किया गया। महाराज ने कहा कि “हनुमान जी को यदि कोई प्रसन्न करना चाहता है तो श्रीराम नाम का स्मरण करे। श्रीराम नाम हनुमान जी का प्राण है। जिस भक्त पर हनुमान जी प्रसन्न हो जाते हैं, उसे सभी सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती हैं और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।”

कथा समापन के पश्चात भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। आरती के दौरान संपूर्ण पंडाल जय श्रीराम और जय हनुमान के जयघोष से गूंज उठा। इसके पश्चात महाराज श्री को भावपूर्ण विदाई दी गई। विदाई के समय ग्रामवासियों की आंखें नम थीं, मानो कोई अपना परिवारजन विदा हो रहा हो। महाराज ने समय-समय पर पुनः पधारने का आश्वासन देकर विदा ली।

इससे पूर्व प्रातःकाल ग्राम की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना के साथ आचार्य माधवलाल शर्मा के सान्निध्य में हवन-पूजन संपन्न हुआ, जिसमें बालाजी मंदिर के पुजारी सहित पाँच यजमान जोड़ो द्वारा विधिवत आहुतियाँ दी गईं।

भक्तों द्वारा 4 जनवरी 2025 को अलसुबह संगीतमय हनुमान चालीसा के 108 पाठ प्रारंभ किए गए, जो देर सायंकाल तक पूर्ण हुए। कड़ाके की ठंड और प्रतिकूल मौसम के बावजूद ग्रामवासियों सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पाठक उपस्थित रहे। इस पूरे आयोजन के दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हनुमान जी महाराज की साक्षात कृपा ग्राम पर बरस रही हो।

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