मादड़ी पंचायत के पुनर्गठन का ग्रामीणों ने किया विरोध, अव्यावहारिक बताकर ज्ञापन सौंपा

मादड़ी पंचायत के पुनर्गठन का ग्रामीणों ने किया विरोध, अव्यावहारिक बताकर ज्ञापन सौंपा
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राजसमंद। जिले में पंचायत समिति पुनर्गठन के तहत मादड़ी पंचायत के विभाजन और वार्ड पुनर्गठन के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। मादड़ी पंचायत के ग्रामीणों ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित पुनर्गठन को अव्यावहारिक, अनुचित और जनहित के विपरीत बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रक्रिया से पंचायत की मूल भौगोलिक और प्रशासनिक संरचना प्रभावित होगी, जिससे आमजन के दैनिक कार्यों में गंभीर परेशानियां उत्पन्न होंगी।

पूर्व पंचायत समिति सदस्य विजय गुर्जर ने बताया कि पुनर्गठन के दौरान पंचायत समिति के पूर्व वार्ड संख्या 14 को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया गया है। यह वार्ड पहले ही पहाड़ी क्षेत्र में फैला हुआ था और इसकी भौगोलिक दूरी लगभग 15 किलोमीटर तक थी। ऐसे में जनप्रतिनिधियों के लिए गांव-गांव पहुंचकर समस्याओं का समाधान करना कठिन था, अब वार्ड को तीन टुकड़ों में बांट देने से स्थिति और जटिल हो जाएगी।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि डूमखेड़ा गांव को वार्ड संख्या 15 में शामिल कर दिया गया है, जबकि यह पहले मादड़ी पंचायत का ही हिस्सा था। इसी प्रकार ढुलियाना गांव को वार्ड संख्या 17 में जोड़कर मादड़ी पंचायत से अलग कर दिया गया है। इसके अलावा मादड़ी और खेमाखेड़ा गांवों को फियावड़ी पंचायत के वार्ड संख्या 13 में शामिल कर दिया गया है, जिससे मादड़ी पंचायत दो हिस्सों में बंट गई है और उसका मूल स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत को इस तरह तीन अलग-अलग वार्डों में विभाजित करना पूरी तरह अव्यावहारिक है। यदि प्रशासनिक कारणों से पंचायत का स्थानांतरण आवश्यक भी हो, तो पूरी पंचायत को एक साथ किसी एक वार्ड में जोड़ा जाना चाहिए, न कि अलग-अलग वार्डों में विभाजित किया जाए। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि निकट दूरी पर स्थित घाटी पंचायत को यथावत रखते हुए मादड़ी पंचायत को विभाजित करना किसी भी दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस पुनर्गठन से आमजन में भारी असंतोष और आक्रोश व्याप्त है। यदि उनकी आपत्तियों और मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

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