जैसलमेर स्टेशन पर रेल हादसे का अभ्यास, 14 घायलों का सफल रेस्क्यू

जैसलमेर। जैसलमेर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को उस समय अफरा तफरी मच गई, जब सूचना मिली कि साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन स्टेशन में प्रवेश करते ही पटरी से उतर गई है। तेज सायरन बजने लगे और स्टेशन परिसर में यात्रियों व कर्मचारियों में घबराहट का माहौल बन गया। हालांकि कुछ देर बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कोई वास्तविक हादसा नहीं, बल्कि आपात स्थिति से निपटने की तैयारी को परखने के लिए आयोजित की गई एक सघन मॉक ड्रिल थी।
मॉक ड्रिल के दौरान दुर्घटना का बेहद वास्तविक दृश्य तैयार किया गया। ट्रेन के डिब्बों को बेपटरी दिखाया गया, जिसमें एक डिब्बा दूसरे डिब्बे के ऊपर चढ़ा हुआ नजर आया। इस दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद लोग सहम गए। कंट्रोल रूम को सूचना मिलते ही रेलवे की स्पार्ट रेस्क्यू टीम तुरंत सक्रिय हुई और जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया। इसके बाद SDRF, NDRF, सिविल डिफेंस और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं।
करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में संयुक्त टीमों ने गैस कटर और आधुनिक उपकरणों की मदद से ट्रेन की खिड़कियां और दरवाजे काटकर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला। इस दौरान कुल 14 यात्रियों का रेस्क्यू किया गया। इनमें से 6 यात्रियों की हालत गंभीर बताई गई, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद जवाहिर हॉस्पिटल रेफर किया गया, जबकि 8 यात्रियों को मौके पर ही मेडिकल कैंप में उपचार देकर छुट्टी दे दी गई।
मॉक ड्रिल के दौरान जैसलमेर एसपी अभिषेक शिवहरे सहित जिला प्रशासन और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरे राहत कार्य का बारीकी से निरीक्षण किया। ऑपरेशन के सफल समापन के बाद जोधपुर रेलवे मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक राकेश कुमार फराड़ी ने बताया कि यह अभ्यास जोधपुर रेल मंडल और NDRF के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसका उद्देश्य रेल दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और प्रतिक्रिया समय का परीक्षण करना था।
वहीं NDRF के सेकेंड कमांडेंट विकास सिंह ने कहा कि रेल हादसों में गोल्डन ऑवर बेहद अहम होता है। कम से कम समय में घायलों को सुरक्षित निकालना प्राथमिक लक्ष्य रहता है, जिसे इस मॉक ड्रिल में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
मॉक ड्रिल की सच्चाई सामने आने के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के अभ्यास भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में जान माल के नुकसान को कम करने में बेहद मददगार साबित होते हैं।
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