सेंट्रल जेल में बुजुर्ग कैदी की मौत: एक महीने में तीसरा मामला, न्यायिक जांच शुरू

सेंट्रल जेल में बुजुर्ग कैदी की मौत: एक महीने में तीसरा मामला, न्यायिक जांच शुरू
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श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर की सेंट्रल जेल में सजा काट रहे एक 70 वर्षीय बुजुर्ग कैदी की बीमारी के कारण मौत हो गई है। यह घटना जेल में पिछले एक महीने के दौरान तीसरी कैदी की मौत का मामला है, जिसने जेल प्रशासन की स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल सूत्रों के अनुसार मृतक कैदी गुरमुखसिंह मजहबी सिख निवासी चक 1-सी (छोटी) का था। उसे चेक अनादर (चेक बाउंस) के एक मामले में 17 नवंबर 2025 को एक वर्ष की सजा सुनाई गई थी और उसी दिन जेल में लाया गया था।

जेल अधिकारियों ने बताया कि गुरमुखसिंह की तबीयत 25 दिसंबर को अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उसे श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में कोई सुधार नहीं होने पर उसे बीकानेर के पीबीएम अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। बीकानेर के अस्पताल में इलाज के दौरान कल शाम उसकी मौत हो गई। इस संबंध में श्रीगंगानगर केंद्रीय जेल के उपकारापाल देवांक शर्मा द्वारा दी गई रिपोर्ट के आधार पर बीकानेर के सदर थाने में कल देर रात मर्ग रिपोर्ट दर्ज की गई है।मृतक के परिवारजनों को मौत की सूचना मिलते ही वे बीकानेर पहुंच गए।आज गुरमुखसिंह की डेड बॉडी का पोस्टमार्टम न्यायिक अधिकारी की मौजूदगी में किया गया। जेल सूत्रों के मुताबिक बुजुर्ग होने के कारण गुरमुखसिंह स्वाभाविक रूप से बीमार पड़ गया था और उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद डेड बॉडी परिवार वालों को सौंप दी गई है। मौत के कारणों की विस्तृत जांच के लिए न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है, जिसकी जिम्मेदारी बीकानेर की स्पेशल जेएम एनआईए एक्ट कोर्ट नंबर-02 की न्यायिक अधिकारी श्रीमती भारती पाराशर को सौंपी गई है।

यह घटना श्रीगंगानगर सेंट्रल जेल में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है। जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक महीने में यह तीसरी मौत है। इससे करीब 15 दिन पहले श्रीगंगानगर की विवेकानंद कॉलोनी के निवासी एक अधेड़ उम्र के कैदी करण भादू की भी मौत हो गई थी। करण भादू सरकारी कार्य में बाधा डालने के एक मामले में सजा काट रहे थे। जेल में लाए जाने के समय से ही उनकी हालत बेहद खराब थी। उसके पैर नहीं कर रहे थे और वे बिस्तर पर ही पड़ा रहता था। उसे श्रीगंगानगर जिला अस्पताल से रेफर कर बीकानेर के पीबीएम अस्पताल भेजा गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इससे कुछ दिन पहले एक अन्य कैदी चुन्नीलाल की भी बीमारी के कारण जेल में मौत हो चुकी है। इन लगातार मौतों ने जेल प्रशासन पर सवाल उठाए है, खासकर बुजुर्ग और बीमार कैदियों की देखभाल को लेकर।

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