उदयपुर की खास परंपरा, भूत बनकर निकला युवक, 4 दिन चलेगी शाही सवारी

उदयपुर की खास परंपरा, भूत बनकर निकला युवक, 4 दिन चलेगी शाही सवारी
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उदयपुर | मेवाड़ की धरा अपनी अनूठी संस्कृति और जीवंत परंपराओं के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इन दिनों झीलों की नगरी उदयपुर में गणगौर उत्सव की धूम है। इसी कड़ी में शुक्रवार को शहर के भोईवाड़ा इलाके में माली समाज की ओर से 'दातन हेला' का आयोजन किया गया, जिसने एक बार फिर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण 'भूत' की बेहद डरावनी झांकी रही, जिसे देखने के लिए तंग गलियों में हजारों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।



50 साल पुरानी परंपरा: नकारात्मकता दूर करने का विश्वास

परंपरा के अनुसार, इसे ‘भोलेनाथ की चेली’ यानी भूत का रूप मानकर पूजा जाता है। भोईवाड़ा में यह अनूठा रिवाज पिछले 50 से ज्यादा सालों से चला आ रहा है। इसमें समाज के ही एक युवक को रस्सियों से मजबूती से बांधकर और भूत का रूप देकर पूरे क्षेत्र की गलियों में घुमाया जाता है। इसके पीछे स्थानीय लोगों की गहरी आस्था और एक नेक भावना है। मान्यता है कि नए साल की शुरुआत में इस तरह प्रतीकात्मक 'भूत' को बांधकर पूरे मोहल्ले में घुमाने से इलाके की सारी नकारात्मकता, बीमारियां और बुरी शक्तियां दूर हो जाती हैं।

रोमांचक दृश्य: ढोल-नगाड़ों की गूंज और भांग-भुजिया का प्रसाद

स्थानीय निवासी रवि माली और नीरज माली ने बताया कि 'दातन हेला' का दृश्य अपने आप में बहुत रोमांचक और ऊर्जा से भरा होता है। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच जब यह झांकी निकली, तो पूरा माहौल जोशो-खरोश से भर गया। इस दौरान भांग और भुजिया का प्रसाद भी बांटा गया। पुरानी मान्यताओं को आज की युवा पीढ़ी ने भी उतने ही जज्बे के साथ संभाल कर रखा है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति से जुड़ने का माध्यम है।

चार दिन घूमेगी शाही सवारी: पिछोला के किनारे पूजी जाएंगी गणगौर

गणगौर उत्सव का मुख्य आकर्षण अभी बाकी है। शनिवार शाम चार बजे से भव्य शाही सवारी का आगाज होगा, जो अगले चार दिनों तक पूरी शानो-शौकत के साथ शहर में घूमेगी। इन चार दिनों में उदयपुर की महिलाएं पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सज-धजकर और सिर पर गणगौर माता की प्रतिमा रखकर गणगौर घाट पहुंचेंगी। वहां पिछोला झील के किनारे पारंपरिक लोक गीतों के बीच माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।

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