चुनाव आयोग का सख्त कदम: राजस्थान में 17 निष्क्रिय पार्टियों का पंजीकरण रद्द, 359 दलों को नोटिस

जयपुर, : चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ईसीआई) ने राजनीतिक पार्टियों के पंजीकरण को साफ-सुथरा बनाने के लिए अपनी मुहिम तेज कर दी है। राजस्थान में 17 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है, जो पिछले छह वर्षों से कोई चुनाव नहीं लड़ पाए। यह कार्रवाई आयोग की दूसरी फेज की सफाई अभियान का हिस्सा है, जिसमें देशभर में कुल 808 पार्टियों को डीलिस्ट किया जा चुका है।
आयोग के अनुसार, यह कदम उन पार्टियों पर उठाया गया है जो न केवल चुनावों में भाग नहीं ले रही हैं, बल्कि अपने पते पर भी अस्तित्वहीन साबित हुई हैं। राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को निर्देश दिए गए थे कि इन पार्टियों को शो-कॉज नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका दिया जाए। लेकिन निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर इनका रजिस्ट्रेशन समाप्त कर दिया गया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी दल बिना वजह डीलिस्ट नहीं किया जाएगा, लेकिन नियमों का पालन न करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
इसके अलावा, आयोग ने 359 अन्य पंजीकृत दलों को चिह्नित किया है, जिन्होंने 2021-22 से 2023-24 तक के वार्षिक ऑडिटेड अकाउंट्स और चुनावी खर्च का ब्योरा जमा नहीं किया। इनमें से कई पार्टियां चुनाव तो लड़ती हैं, लेकिन वित्तीय पारदर्शिता का पालन नहीं करतीं। राजस्थान सहित 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इन दलों को नोटिस जारी करने और सुनवाई आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि ये दल संतोषजनक जवाब नहीं देते, तो उनका पंजीकरण भी रद्द हो सकता है।
ईसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "हमारा उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। ये 'लेटर पैड पार्टियां' सिस्टम का बोझ बढ़ा रही हैं। कुल 2,800 से अधिक आरयूपीपी में से केवल 750 ने ही 2024 के लोकसभा चुनाव लड़े थे।" आयोग ने 2019 से ही इस प्रक्रिया को शुरू किया था, जिसमें छह साल तक चुनाव न लड़ने वाले दलों को हटाने का प्रावधान है। प्रतिनिधित्व ऑफ पीपल एक्ट, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन उल्लंघन पर डी-रजिस्ट्रेशन का अधिकार आयोग को है।
राजस्थान में डीलिस्ट हुई पार्टियों में स्थानीय स्तर की छोटी-मोटी पार्टियां शामिल हैं, जो वर्षों से निष्क्रिय पड़ी थीं। राज्य निर्वाचन विभाग ने इनके पतों पर जांच कर पाया कि ज्यादातर कार्यालय बंद हैं या अस्तित्व में ही नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भ्रष्टाचार और फर्जी पार्टियों पर अंकुश लगाने में मददगार साबित होगा।
देशभर में दूसरे फेज में सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर प्रदेश रहा, जहां 121 पार्टियां डीलिस्ट हुईं। इसके बाद महाराष्ट्र (44), तमिलनाडु (42), दिल्ली (40), मध्य प्रदेश (23) और राजस्थान (17) का स्थान है। आयोग ने चेतावनी दी है कि आगे भी यह अभियान जारी रहेगा, और पार्टियों को नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है, लेकिन कुछ छोटे दलों ने इसे 'अत्याचार' करार दिया। एक प्रभावित पार्टी के प्रवक्ता ने कहा, "हमें पर्याप्त समय नहीं दिया गया।" हालांकि, आयोग का कहना है कि सभी को सुनवाई का मौका दिया गया।
यह अभियान चुनावी सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण है, खासकर जब आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी जोरों पर है। पार्टियों को सलाह दी जाती है कि वे तत्काल अपने वित्तीय ब्योरे जमा करें, वरना कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
