लिपिक भर्ती 2013 की जांच अब एसओजी के हवाले:: 10 हजार पदों पर हुआ था खेल, फर्जीवाड़ा करने वालों और लापरवाह अफसरों में हड़कंप

10 हजार पदों पर हुआ था खेल, फर्जीवाड़ा करने वालों और लापरवाह अफसरों में हड़कंप
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जयपुर। राजस्थान की बहुचर्चित जिला परिषद लिपिक भर्ती-2013 में हुए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की जांच अब स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) करेगा। विधानसभा में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर द्वारा की गई इस घोषणा के बाद उन अभ्यर्थियों और अधिकारियों की धड़कनें तेज हो गई हैं, जिन्होंने सांठगांठ कर अपात्र होते हुए भी नियुक्तियां पा ली थीं।

10 हजार भर्तियों का होगा दूध का दूध और पानी का पानी

प्रदेश भर में इस भर्ती के तहत करीब 10 हजार लिपिकों की नियुक्ति की गई थी, जिनमें अकेले अलवर जिले के 600 लिपिक शामिल हैं। फर्जीवाड़े का सबसे पहला मामला अलवर में ही उजागर हुआ था, जिसे मीडिया द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद सरकार हरकत में आई। इससे पहले सरकार ने जिला कलेक्टर्स को जांच सौंपी थी, लेकिन कई जिला परिषदों द्वारा जांच में सहयोग न करने और तथ्यों को छिपाने के कारण अब कमान एसओजी को सौंप दी गई है।

दस्तावेज छिपाने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज

मंत्री मदन दिलावर ने सदन में कड़े तेवर दिखाते हुए साफ किया कि जिन जिला परिषद अधिकारियों ने जांच के दौरान दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए या जानबूझकर गलत रिपोर्ट भेजी है, उन्हें तुरंत चार्जशीट जारी की जाएगी। सरकार के इस सख्त रुख से न केवल फर्जी दस्तावेज लगाने वाले कर्मचारी, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले अफसर भी रडार पर आ गए हैं।

भर्ती में धांधली की एसओजी जांच के मुख्य बिंदु:

फर्जी डिग्रियां: कंप्यूटर डिप्लोमा और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच।

अनुभव के गलत अंक: संविदा कर्मियों को दिए गए बोनस अंकों के सत्यापन में गड़बड़ी।

अधिकारियों की भूमिका: भर्ती प्रक्रिया के दौरान चयन समितियों द्वारा बरती गई लापरवाही या मिलीभगत।

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