जीवन में सफल होने के लिए वाणी में मधुरता एवं व्यवहार कुशलता का होना आवश्यक : साध्वी जयदर्शिता

उदयपुर। तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ जैन मंदिर में श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में कलापूर्ण सूरी समुदाय की साध्वी जयदर्शिता श्रीजी, जिनरसा श्रीजी, जिनदर्शिता श्रीजी व जिनमुद्रा श्रीजी महाराज आदि ठाणा की चातुर्मास सम्पादित हो रहा है।
महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि मंगलवार को ज्ञान की आराधना की गई। सभी श्रावक-श्राविकाओं ने जैन ग्रंथ की पूजा-अर्चना की। चातुर्मास में एकासन, उपवास, बेले, तेले, पचोले आदि के प्रत्याख्यान श्रावक-श्राविकाएं प्रतिदिन ले रहे हैं और तपस्याओं की लड़ी लगी हुई है।
आयड़ तीर्थ पर धर्मसभा में साध्वी जयदर्शिता श्रीजी ने कहा कि चारों गति के जीव आहार करते हैं. मनुष्य जो आहार ग्रहण करते हैं, उनमें से 20 प्रतिशत आहार से सप्त धातुएँ बनती है. इनसे हमारे शरीर को शक्ति मिलती है। देवता जो आहार ग्रहण करते हैं, वह भाव आहार होता है. विस्तार से जानना हो तो भगवती सूत्र का पारायण करें। जो बात कम बोल कर समझाई जा सकती है वहां व्यर्थ में अधिक बोलकर क्यों अपनी वाचालता का परिचय दिया जाए? अधिक बोलने वाले की बात पर कोई ध्यान नहीं देता है, ऐसे व्यक्तियों की कद्र नहीं होती। वाचालता, कुटिलता, कटुता, कर्कशता, कठोरता ये वाणी के दोष है। बोलने और खाने में समय व प्रमाण का ध्यान रखा जाए तो अतिक्रमण से बच जाते हैं।
मधुर वचन व्यवहार यह जीव की व्यावहारिक प्रवृत्ति है। केवल अपनी शेखी बघारना, अहंकार भरी बातें करना, अपशब्दों का उपयोग करना इत्यादि अशोभनीय आचरण से मनुष्य के सद्गुणों का नाश होता है। श्रेष्ठ मानव बनने के लिए परस्पर मधुर वाणी का आदान-प्रदान करने से पारस्परिक संबंध मजबूत होते हैं। जीवन में सफल होने के लिए वाणी में मधुरता एवं व्यवहार कुशलता का होना अत्यंत जरूरी है। मधुर वाणी के द्वारा एक-दूसरे का भाव भरा अभिवादन करने का अभ्यास करने से आत्म संतुष्टि एवं आध्यात्मिक तृप्ति मिलती है।
इस अवसर पर कुलदीप नाहर, भोपाल सिंह नाहर, अशोक जैन, संजय खाब्या, भोपाल सिंह परमार, सतीश कच्छारा, चतर सिंह पामेचा, राजेन्द्र जवेरिया, अंकुर मुर्डिया, पिन्टू चौधरी, हर्ष खाब्या, गजेन्द्र खाब्या, नरेन्द्र सिरोया, राजू पंजाबी, रमेश मारू, सुनील पारख, पारस पोखरना, राजेन्द्र जवेरिया, प्रकाश नागौरी, दिनेश बापना, अभय नलवाया, कैलाश मुर्डिया, गोवर्धन सिंह बोल्या, दिनेश भंडारी, रविन्द्र बापना, चिमनलाल गांधी, प्रद्योत महात्मा, रमेश सिरोया, कुलदीप मेहता आदि मौजूद रहे।
