जिले में हरित ऊर्जा को बढ़ावा दे रहे राजकीय कार्यालय, लाखों रुपयों की हो रही बचत

उदयपुर, । मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में गत बजट में हुई घोषणा को धरातल पर लागू करने में उदयपुर जिला अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पारेशन लिमिटेड (आरआरईसीएल) द्वारा एचएएम (हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल) मोड पर संचालित सौर ऊर्जा परियोजना के अंतर्गत जिले में सरकारी भवनों पर सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे न केवल इन कार्यालयों के बिजली खर्च में भारी कमी आई है बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है।
जिले के परियोजना अधिकारी रोहित मीणा ने बताया कि इस परियोजना के तहत अब तक जिले के 30 प्रमुख सरकारी भवनों पर कुल 1.5 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र सफलतापूर्वक स्थापित कर कमीशन किए जा चुके हैं। इन संयंत्रों से उत्पादित स्वच्छ ऊर्जा से संबंधित भवनों की विद्युत आवश्यकताएं पूरी हो रही हैं, जिससे इन संस्थानों के बिजली बिल लगभग शून्य हो गए हैं।
परियोजना के अंतर्गत जिन प्रमुख सरकारी संस्थानों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है, उनमें कर भवन पर 120 किलोवाट, आरटीडीसी कजरी होटल पर 110 किलोवाट, टीबी हॉस्पिटल पर 150 किलोवाट, प्रिंसिपल मॉडल पब्लिक स्कूल पर 90 किलोवाट तथा सर्किट हाउस, फतेह सागर पर 83 किलोवाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अन्य कई विभागीय कार्यालयों, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थानों को भी सौर ऊर्जा से लाभान्वित किया गया है।
परियोजना अधिकारी मीणा ने बताया कि परियोजना के दूसरे चरण में जिले के 20 अन्य सरकारी भवनों पर कुल 949 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों का कार्य अंतिम चरण में है, जिन्हें शीघ्र ही पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके बाद उदयपुर जिले में सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा उत्पादन की कुल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इन सौर संयंत्रों से जहां सरकार को प्रतिवर्ष लाखों रुपये की बिजली लागत से राहत मिल रही है, वहीं कार्बन उत्सर्जन में कमी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
