जनजाति कल्याण कोष योजना अन्तर्गत मुर्गी ईकाई एवं बकरी इकाई वितरण के लिए मांगे आवेदन

जनजाति कल्याण कोष योजना अन्तर्गत मुर्गी ईकाई एवं बकरी इकाई वितरण के लिए मांगे आवेदन
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उदयपुर, । जनजाति समाज से जुड़े पशुपालकों को आर्थिक रूप से संबंल प्रदान करने को लेकर सरकार कटिबद्ध है। इसी कड़ी में जनजाति कल्याण कोष (टीएडी) योजना वर्ष 2025-26 के अन्तर्गत उदयपुर एवं सलूम्बर जिलों के 18 ब्लॉक के गांवों के पशुपालकों को निःशुल्क मुर्गी इकाई (50 चूजे) एवं बकरी यूनिट (5 बकरी और 1 बकरा) वितरण को लेकर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इसके तहत पशुपालकों को मुर्गी इकाई एवं बकरी यूनिट का वितरण किया जाएगा, जिससे जनजाति समाज आर्थिक उन्नयन की राह पर अग्रसर हो सके।

कार्य योजना एवं उद्देश्य-

1. उत्तम नस्ल के बकरे एवं बकरी का वितरण कर जनजाति क्षेत्र में बकरियों की उत्तम नस्ल तैयार करना।

2. जनजाति बकरी पालकों को रोजगार के अधिक अवसर प्रदान कर आर्थिक व सामाजिक उन्नयन।

3. जनजाति समुदाय को खाद्य सुरक्षा व गुणवत्ता युक्त पोषण प्रदान करना।

4. जनजाति क्षेत्र में बकरी उत्पादों यथा दुध व उत्पाद एवं मांस की मात्रा में बढ़ोतरी व गुणवत्ता में सुधार। दुध उत्पादन में वृद्धि करना, नये रोजगार का सृजन एवं शहरी क्षेत्रों की तरफ पशुपालकों के पलायन को रोकना।

5. वर्तमान में जिले के जनजाति बकरी पालकों के पास अवर्गीकृत, कम उत्पादन वाली बकरियां होने, बकरीपालन की नवीनतम तकनीक का ज्ञान न होने से उचित लाभ नहीं मिल रहा है। उत्तम नस्ल, बेहतर प्रबन्धन, नवीनतम तकनीक के समावेश, बकरीदूध व उत्पाद एवं मांस की बेहतर विपणन व्यवस्था से जनजाति पशुपालकों को अधिकतम लाभ के माध्यम से आर्थिक उन्नयन किया जा सकता है। इस योजनान्तर्गत क्षेत्र के चयनित जनजाति बकरीपालकों को एक बकरा एवं पांच सिरोही/उन्नत नस्ल की बकरियों (बकरी 5 $ 1 बकरा) का वितरण किया जायेगा।

संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश कुमार जैन ने बताया कि योजना के तहत मुख्य उद्देश्य चयनित गांवों के एकीकृत सामाजिक-आर्थिक विकास को प्राप्त करना है। उदयपुर जिले में 90 बकरी ईकाई एवं 815 मुर्गी ईकाई तथा सलूम्बर जिले में 50 बकरी ईकाई एवं 395 मुर्गी ईकाई का वितरण किया जाएगा।

लाभार्थी का चयन-

ब्लॉक (पंचायत समिति) में जनजाति क्षेत्र के इच्छुक लाभार्थी/बकरी पालक/कुक्कुट पालक 7 दिवस में अपना आवेदन मय दस्तावेजों के साथ चयनित राजस्व ग्राम के नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था में जमा करा सकते हैं। डॉ. जैन ने बताया कि योजना में राजस्व ग्राम के जनजाति वर्ग के पशुपालक आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए पशुपालक की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा वह कम से कम पांचवीं कक्षा पास होना आवश्यक है। एक परिवार से एक लाभान्वित का ही चयन होगा (चाहें राशनकार्ड या-जन आधार कार्ड अलग-अलग क्यों ना हों)। आवेदन के लिए आधार कार्ड, विधवा/विकलांग/कमजोर आय वर्ग, भूमिहीन अथवा लघु सीमान्त एवं महिला बकरी पालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। संबंधित दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा। इच्छुक आवेदक केवल एक श्रेणी (बकरी इकाई अथवा मुर्गी इकाई वितरण) में ही आवेदन कर सकते हैं। चयनित लाभार्थियों की सूचियों का अनुमोदन संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच/जनप्रतिनिधि द्वारा किया जाना आवश्यक है।

लाभार्थी पशुपालक का चयन संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में उप निदेशक (पशुधन विकास) एवं ब्लॉक नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग एवं ग्राम विकास अधिकारी/प्रशासक संबंधित ग्राम पंचायत की समिति द्वारा किया जाएगा। जनजाति वर्ग के आवेदन लक्ष्य से अधिक होने पर उनका चयन लॉटरी सिस्टम के आधार पर किया जाएगा।

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