पूर्वोत्तर की एकता और समरसता का उत्सव, ‘ऑक्टेव’ महोत्सव हुआ समापन

उदयपुर / नागपुर, भारत के लिए पूर्वोत्तर के आठों राज्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यद्यपि उनकी भाषा और संस्कृति भिन्न है, फिर भी ‘भाषाएँ अनेक, पर देश हमारा एक’—इस सिद्धांत के अनुरूप एकता का संदेश पूर्वोत्तर के लोगों ने दिया है। यह प्रतिपादन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (उदयपुर) और दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (नागपुर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय ‘नॉर्थ ईस्ट ऑक्टेव’ महोत्सव का समापन रविवार को भव्यता के साथ हुआ।
समारोही कार्यक्रम में मंच पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहायक निदेशक दुर्गेश चांदवानी, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक डॉ. आस्था कार्लेकर तथा सहायक निदेशक दीपक कुलकर्णी उपस्थित थे।
समापन अवसर पर उपस्थित कलाकारों और नागरिकों से संवाद करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि पूर्वोत्तर के हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट्स और बांस से बने उत्पाद पूरे देश में लोकप्रिय हैं। उन्होंने बताया कि उनके मंत्रीकाल में असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के सड़क विकास कार्य किए गए। इसके साथ ही काजीरंगा से नुमालीगढ़ के बीच एलिवेटेड हाईवे का निर्माण हो रहा है। पहले ब्रह्मपुत्र नदी पर केवल दो पुल थे, अब उनकी संख्या नौ हो गई है।
इस अवसर पर पूरे महोत्सव के कोरियोग्राफर तरुण प्रधान और बांस शिल्प कलाकार मुकेश सायकिया का नितिन गडकरी के हाथों सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मणिपुर के पारंपरिक नृत्य पुंग ढोल चोलम से हुई, जो सामान्यतः होली पर्व पर वहां प्रस्तुत किया जाता है। इस नृत्य के साथ मार्शल आर्ट और थांग-टा युद्धकौशल का भी शानदार प्रदर्शन किया गया। इसके बाद आसाम का पारंपरिक नृत्य सतरिया डांस प्रस्तुत किया गया, जिसमें श्रीकृष्ण की लीलाओं को संगीत, काव्य और पद-लालित्य के माध्यम से सुंदर रूप में अभिव्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में नॉर्थ-ईस्ट रॉक बैंड समूह ने विभिन्न देशभक्ति गीतों का सामूहिक वाद्य और गायन प्रस्तुत किया, जिसकी शुरुआत ए. आर. रहमान के लोकप्रिय गीत ‘वंदे मातरम’ से की गई।
