मालदास स्ट्रीट आराधना भवन में चल रहे है निरंतर धार्मिक प्रवचन

मालदास स्ट्रीट आराधना भवन में चल रहे है निरंतर धार्मिक प्रवचन
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उदयपुर, । मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वर महाराज की निश्रा में बड़े हर्षोल्लास के साथ चातुर्मासिक आराधना चल रही है। संघ के कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया कि मालदास स्ट्रीट आराधना भवन में चल रहे नवाह्निक महोत्सव में रविवार को उदयपुर में नमस्कार महामंत्र के अखण्ड भाष्य जाप के साथ नौ एकासना और नवाह्निका महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ चल रहा है। आज महोत्सव के आठवें दिन 45 आगम पूजा में शेष रहे 22 आगमों की पूजा बड़े हर्षोल्लास से पढाई गई।

रविवार को मरुधर रत्न आचार्य देव रत्नसेन सूरी महाराज ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के 14,000 साधु शिष्य और 36,000साध्वी शिष्याएँ थी। इन 14000 साधुओं ने एक-एक ग्रंथ की रचना की थी जिन्हें प्रकीर्णक ग्रंथ के रूप में कहा जाता है। वर्तमान में लगभग 20 प्रकीर्णक ग्रंथ प्राप्त होते है जिनमें से 10 प्रकीर्णक का समावेश किया गया है। विशेष रूप से इन प्रकीर्णक ग्रंथों में कई प्रकीर्णक ग्रंथ विशेष रूप से मरण समय समाधि भाव को प्राप्त करने का उपदेश दिया है। संसार में जिसका जन्म हुआ है, उसका एक दिन मरण निश्चित है। आज तक हमारी आत्मा ने अनंत बार जन्म और मरण किये है। दु:खों को मजबूरी से रोते-रोते असमाधि भाव पूर्वक सहन करते हुए जो भी मरण किये है उससे तो हमने अपने जन्म-मरण की परम्परा को ही बढ़ाने का काम किया है। जन्म-मरण की परम्परा का अंत करना है तो समता भाव पूर्वक समाधि मरण की प्राप्ति खूब आवश्यक है। मरण समय शरीर के दुख और पीड़ा को भूलकर प्रभु के नामस्मरण के साथ देह के त्याग की क्रिया को समाधि मरण कहा जाता है। देह और आत्मा के भेद की प्रतिती के बोध पूर्वक का एक मरण भी हमारी जन्म-मरण की परंपरा को तोड़ने में समर्थ बनता है। कोषाध्यक्ष राजेश जावरिया ने बताया 15 सितंबर को प्रात: 9.30 बजे प्रवचन एवं 10.15 बजे सत्रह भेदी पूजा का आयोजन होगा।

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