कब एवं हीरक पंख बुलबुल, गोल्डन ऐरो कब बुलबुल प्रशिक्षण संपन्न

उदयपुर, । राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड मण्डल मुख्यालय उदयपुर के तत्वाधान में जिला स्तरीय चतुर्थ चरण कब एवं हीरक पंख बुलबुल, गोल्डन ऐरो कब बुलबुल प्रशिक्षण शिविर 12 से 14 फरवरी तक उदयनिवास पर आयोजित किया गया।
समापन समारोह महाराणा मेवाड़ विधा मंदिर स्कूल अंबामाता की प्रधानाचार्य प्रतिमा शर्मा के मुख्य आतिथ्य में हुआ। डॉ धर्मपाल सिंह डूडी महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के ग्रुप लीडर एवं रोवर लीडर डॉ धर्मपालसिंह डूडी तथा अभिनव शिक्षण संस्थान के निदेशक सुरेन्द्र रावल व कुशल रावल विशिष्ट अतिथि रहे। सी. ओ. स्काउट सुरेन्द्र कुमार पाण्डे ने बताया कि शिविर में महाराणा विधा मंदिर स्कूल ,राकवुडस हाई स्कूल,अभिनव स्कूल,बी एन पब्लिक स्कूल,मिकेडो ग्लोबल स्कूल, हैप्पी होम स्कूल के 150 कब बालकों तथा 145 बालिकाओं ने भाग लिया। शुरुआत में अतिथियों का स्काउट आंदोलन का स्कार्फ पहनाकर तथा मेवाड़ी परंपरा अनुसार उपरणा पहनाकर अभिनंदन किया। कब विभाग के प्रधान शिविराधिपति सी ओ स्काउट सुरेन्द्र कुमार पाण्डे थे तथा बुलबुल विभाग की शिविराधिपति सी ओ गाइड अभिलाषा मिश्रा थी। चतुर्थ चरण कब शिविर का संचालक कुंज बिहारी मेनारिया वरिष्ठ ट्रेनिंग काउंसलर ने किया, हीरक पंख बुलबुल शिविर का संचालन अंजना शर्मा लीडर ट्रेनर ने किया।
पाण्डे ने बताया कि शिविर मे प्रथम चरण से गोल्डन ऐरो तक के सैद्धांतिक और प्रायोगिक प्रशिक्षण और परीक्षण के साथ ही आंदोलन की जानकारी, नियम, प्रतिज्ञा, चिन्ह, सैल्यूट, आदर्श वाक्य, जंगल बुक की मोगली कहानी, वीर गर्जना, विशाल गर्जना,बी पी सिक्स, यूनिफार्म, दक्षता बैज, टैस्ट कार्ड, लाल फूल, सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम, विभिन्न विषयों की प्रतियोगिताएं पैपर कटिंग,पैपर मेशी, कले आर्ट, ड्राइंग, निबंध, भाषण सहित मेंढक कूद, बगड़ चलाना,तारा की कहानी,घेरे के गीत आदि का प्रशिक्षण और जांच कुशल और दक्ष प्रशिक्षकों ने दिया।
बतौर मुख्य अतिथि पद से संभागियो को संबोधित करते हुए प्रतिमा शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में बालक बालिकाओं को स्काउटिंग की महत्ता निश्चित तौर पर सुनागरिक की और ले जाने का सशक्त माध्यम है। शिविर में सीखे गए अनुशासन, समय की पाबंदी तथा व्यक्तित्व निर्माण के टिप्स की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि यह गतिविधि हरेक स्कूल में चलना आवश्यक है।
विशिष्ठ अतिथि पद से संबंधित करते हुए डॉ धर्मपाल सिंह डूडी ने कहा कि कच्ची मिट्टी को ही आकार दिया जाना संभव है स्काउट गाइड आंदोलन में आयु वर्ग के अनुसार विभिन्न शाखाएं इस बात की जीवंत उदाहरण है। बाल्यकाल में जो छात्र छात्राएं कब बुलबुल के रुप में अपने आदर्श वाक्य कोशिश करो से शुरू होकर युवा बनने पर रोवर रेंजर के रुप में आदर्श वाक्य सेवा को चरितार्थ करते हैं। विशिष्ट अतिथि पद से ही सुरेन्द्र कुमार रावल और कुशल रावल ने अपने स्काउटिंग के संस्मरण सुनाए। संचालन व्यवस्थाओं में सहयोग करने वाले संभागी कब बुलबुल के स्काउटर गाइडर का अतिथियों के कर कमलों से उपरणा पहनाकर सम्मानित किया गया। कब बुलबुल ने शिविर मेरी नजर में अपने अनुभव भी सुनाए।
