देवास तृतीय व चतुर्थ परियोजना प्रभावित 368 परिवारों के पुनर्वास हेतु जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित

उदयपुर,। उदयपुर शहर की पेयजल संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करने तथा शहर की विश्वप्रसिद्ध झीलों को सैदव भरा रखने की महत्वाकांक्षी परियोजना देवास के तृतीय एवं चतुर्थ बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों के भूमि अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े विषयों पर जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति की बैठक बुधवार को जिला कलेक्टर नमित मेहता की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में आयोजित हुई।
बैठक में परियोजना से प्रभावित कुल 368 परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा वितरण एवं पुनर्व्यवस्थापन योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि प्रभावित परिवारों को यथासंभव उनके मूल गांवों के निकट बसाने की योजना बनाई जा रही है। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावित परिवारों को 30 गुणा 60 फीट का आवासीय भूखंड तथा पशुपालन के लिए 30 गुणा 15 फीट का पशु बाड़ा उपलब्ध कराया जाएगा। पुनर्वास स्थलों पर स्कूल, सामुदायिक भवन, पेयजल, सड़क, जल निकासी, आंगनबाड़ी, उपस्वास्थ्य केंद्र, शौचालय, पशु चिकित्सालय, उचित मूल्य की दुकान, खेल मैदान, अंतिम संस्कार स्थल एवं पूजा स्थल सहित सभी मूलभूत सुविधाओं का विकास नियमानुसार किया जा रहा है।
बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि एक ही परिवार के सदस्यों को पास-पास भूखंड आवंटित किए जाएं। इस पर जिला कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि भूखंड आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया में इस भावना का यथासंभव ध्यान रखा जाएगा। साथ ही कलेक्टर मेहता ने यह भी कहा कि बैठक के बाद भी यदि प्रभावित परिवारों या जनप्रतिनिधियों के कोई सुझाव आते हैं तो उन्हें गंभीरता से सुना जाएगा और नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया जाए। बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर दीपेन्द्र सिंह राठौड़, भूमि अवाप्ति अधिकारी एवं गोगुन्दा उपखण्ड अधिकारी शुभम भैसारे, परियोजना के अधीक्षण अभियंता मनोज जैन, अधिशासी अभियंता बीरबल डूडी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही डूब प्रभावित ग्रामों के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने भी बैठक में भाग लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
