झीलों के किनारे और सुरम्य पहाड़ियों में गूंजा “काई ऽऽऽ पो ऽऽऽ छे ऽऽऽ“

झीलों के किनारे और सुरम्य पहाड़ियों में गूंजा “काई ऽऽऽ पो ऽऽऽ छे ऽऽऽ“
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उदयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर बुधवार को जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग के तत्वावधान में पतंग उत्सव आयोजित हुए। झीलों के किनारे तथा सुरम्य पहाड़ियों के बीच आयोजित इन पतंग उत्सवों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, पर्यटकों ने उत्साह के साथ भाग लिया। पतंग बाजी के दौरान “काई ऽऽऽ पो ऽऽऽ छे ऽऽऽ“ की गूंज माहौल में जोश का संचार करती रही।

राज्य सरकार के निर्देशानुसार बुधवार को मकर संक्रांति के अवसर पर राज्य भर में संभागीय मुख्यालयों एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पतंग उत्सव आयोजित किए गए। इसी क्रम में उदयपुर संभाग मुख्यालय पर भी संभाग स्तरीय पतंग उत्सव आयोजित हुए। जिला कलेक्टर नमित मेहता के निर्देशन में पर्यटन विभाग की ओर से शहर की विश्वप्रसिद्ध फतहसागर झील की पाल, पिछोला स्थित गणगौर घाट, मोतीमगरी तथा मेवाड़ के मुकुटमणी के नाम से विख्यात सज्जनगढ़ दुर्ग स्थल पर पतंग उत्सव हुए। फतहसागर की पाल पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन दीपेंद्रसिंह राठौड़, अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर जितेंद्र ओझा, बड़गांव एसडीएम लतिका पालीवाल, गिर्वा एसडीएम अवुला सांईकृष्ण, पर्यटन उपनिदेशक शिखा सक्सेना आदि ने भी पतंगबाजी का लुत्फ लिया। पाल पर सैकड़ों की संख्या में शहरवासी तथा पर्यटकों ने पतंगें उड़ाई। इस दौरान हर आयु वर्ग के लोगों में अपार उत्साह देखा गया। सभी आगंतुकों को तिल के लड्डू और गजक का वितरण भी किया गया। गणगौर घाट पर नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के निर्देशन में उपायुक्त दिनेश कुमार मंडोवरा, अधिशासी अभियंता शशि बाला सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी सत्यनारायण शर्मा, निगम पुलिस निरीक्षक मांगीलाल डांगी सहित शहर के गणमान्य एवं पर्यटकों ने पतंग उड़ा कर इस त्यौहार को उत्सव के रूप में मनाया।

झामर कोटड़ा में भी उड़ी पतंगें

राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड की झामर-कोटड़ा जिंक-सीसा खदान क्षेत्र में भी मकर संक्रांति एवं पतंग उत्सव का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। आरएसएमएमएल के समूह महाप्रबंधक आर के शर्मा एवं महाप्रबंधक खान राजीव वर्मा के नेतृत्व में अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों ने सामूहिक रूप से भाग लिया। खनि अभियंता आसिफ मोहम्मद अंसारी ने मकर संक्रांति के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए सुरक्षित पतंगबाजी, पर्यावरण संरक्षण तथा पक्षी सुरक्षा हेतु इको-फ्रेंडली मांझे के उपयोग का संदेश दिया।कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक तिल-गुड़, गजक एवं मिठाइयों का आदान-प्रदान किया गया तथा सामूहिक सौहार्द एवं टीम भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।

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