खाद संकट पर किसानों का अनोखा विरोध, गधों को माला पहनाकर जताया आक्रोश

उदयपुर में यूरिया खाद की किल्लत से परेशान किसानों ने बुधवार को सरकार और प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अनूठा और व्यंग्यात्मक प्रदर्शन किया। मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के बैनर तले कृषि विभाग कार्यालय के बाहर किसानों ने गधों को फूलों की माला पहनाई, गुलाब जामुन खिलाकर मुंह मीठा कराया और खाद के बैग की तस्वीर को कुर्सी पर रखकर उस पर पुष्प अर्पित करते हुए शोक जताया। किसानों ने इस दृश्य के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि खाद की कमी ने उनकी खेती और आजीविका को किस हद तक प्रभावित किया है।
मेवाड़ किसान संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु पटेल ने बताया कि खाद की जरूरत के समय बड़े पैमाने पर कालाबाजारी हो रही है। सरकार द्वारा तय 277 रुपये प्रति बैग की जगह किसानों से 450 से 500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। आरोप लगाया गया कि यह सब अधिकारियों की शह पर हो रहा है और कमीशनखोरी के चलते किसान परेशान हैं।
पटेल ने कहा कि लाइसेंस प्राप्त गोदामों में 100 बैग ही भेजे जा रहे हैं, जबकि करीब 150 बैग अन्य जगहों पर पहुंचाकर कालाबाजारी की जा रही है। स्थिति यह है कि एक किसान को जरूरत के अनुसार 10 बैग मिलने चाहिए, लेकिन उसे केवल 2 बैग ही दिए जा रहे हैं, जबकि रिकॉर्ड में पूरा आवंटन दिखा दिया जाता है। कई किसानों के मोबाइल पर खाद वितरण से संबंधित संदेश तक नहीं आ रहे हैं।
समिति के सह संयोजक मदनलाल डांगी ने कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी चल रही है। सरकार के पास कृषि भूमि, फसल और उत्पादन से जुड़ा पूरा डेटा होने के बावजूद हर साल रबी और खरीफ सीजन में यही समस्या सामने आती है, जो गंभीर सवाल खड़े करती है।
किसानों ने मांग की कि खाद वितरण भी राशन प्रणाली की तरह पारदर्शी बनाया जाए। इसके लिए समिति गठन, पॉश मशीन से खरीद की पर्ची और कृषि भूमि के आधार पर खाद वितरण की व्यवस्था लागू की जाए।
प्रदर्शन के बाद किसानों ने कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुधीर वर्मा को ज्ञापन सौंपा। समिति ने बताया कि इससे पहले भी जिला कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन दिया जा चुका है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
उदयपुर जिले में पिछले 40 से 45 दिनों से यूरिया खाद की भारी किल्लत बनी हुई है। लंबी कतारों में लगने के बावजूद किसानों को मांग के मुकाबले केवल 50 प्रतिशत खाद ही मिल पा रही है। जिले के 3 से 4 लाख से अधिक किसान इस संकट से प्रभावित हैं। हाल ही में कृषि मंडी में लॉटरी के जरिए खाद वितरण तक की स्थिति बन गई थी।
उदयपुर जिले में करीब 4 लाख 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें मक्का, ज्वार, गेहूं, जौ, दालें और तिलहन प्रमुख फसलें हैं। सबसे अधिक मक्का की खेती होती है, जो हर साल लगभग 1.40 लाख हेक्टेयर भूमि पर की जाती है। खाद संकट के चलते इन फसलों पर सीधा असर पड़ रहा है।
