गांधी जी का चिंतन, पशुओं के प्रति व्यवहार ही किसी राष्ट्र की महानता का मापदंड है-शहीद दिवस पर संगोष्ठी

उदयपुर, । राजकीय पशुपालन प्रशिक्षण संस्थान में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेंद्र छंगाणी ने गांधीजी के जीवन दर्शन, सत्य, अहिंसा और करुणा के सिद्धांतों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ. छंगाणी ने कहा कि गांधी जी पशु कल्याण, करुणा और मानवता के सच्चे प्रतीक थे और उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाते हैं। इस अवसर पर संस्थान के छात्रों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने राम धुन ष्रघुपति राघव राजा रामष् और उनका पसंदीदा भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ भी गाया। पशुओं के प्रति प्रेम, पशु कल्याण, करुणा, दया और प्रेम प्रतीक हैं। गांधीजी के आदर्शों को जीवन में उतारने के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि गांधीजी ने अपने एक संदेश में कहा है कि किसी भी देश की महानता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह देश अपने जानवरों के साथ कैसा व्यवहार करता है। गांधीजी ने गरीबों की गायों और बकरियों की उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए बकरी पालन के माध्यम से आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का संदेश भी दिया। कम पूंजी से भी कोई व्यक्ति बकरी पालकर जीविका कमा सकता है। बकरी के दूध के पौष्टिक गुणों को देखते हुए, उन्होंने नियमित रूप से इसका सेवन करने की बात कही। इस अवसर पर डॉ. पद्मा मील ने पशुपालन के संबंध में गांधीजी के कथनों के बारे में विस्तृत जानकारी दी और कहा कि गांधीजी का संपूर्ण जीवन सादगी और उच्च विचारों से परिपूर्ण था। आज भी पूरी दुनिया उनके द्वारा दी गई नैतिकता और अहिंसा की शिक्षा के महत्व को पहचानती है। पशुपालन डिप्लोमा के छात्रों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. ओमप्रकाश साहू ने कार्यक्रम का संचालन किया और गांधीजी के जीवन के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
