जनजातीय गुणीजनों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन

उदयपुर, । माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (टी.आर.आई.), उदयपुर एवं अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को संस्थान परिसर में जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जनजातीय चिकित्सकों (गुणीजनों) के लिए एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। टीआरआई निदेशक ओ पी जैन ने बताया कि

यह कार्यशाला राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में जनजातीय चिकित्सकों को औपचारिक मान्यता प्रदान कर उन्हें सहयोगी भागीदार के रूप में शामिल करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में अतिरिक्त आयुक्त टीएडी कृष्णपाल सिंह चौहान, निदेशक सांख्यकी सुधीर दवे, सहायक निदेशक बनवारी लाल बुम्बरिया, अतिरिक्त प्रोफेसर, एम्स जोधपुर प्रदीप द्विवेदी, डॉ राखी द्विवेदी, डॉ किरण द्विवेदी सहित 18 जनजातीय चिकित्सकों ने भाग लिया। साथ ही जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से एम्स जोधपुर द्वारा क्रियान्वित एस.टी.एच.आर. केंद्र, आबूरोड की 10 सदस्यीय चिकित्सकीय टीम भी उपस्थित रही।

इस अवसर पर निदेशक जैन ने कहा कि जनजातीय चिकित्सकों को उनके समुदायों में पीढ़ियों से विश्वास एवं सामाजिक मान्यता प्राप्त है। दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में आमजन सबसे पहले इन्हीं चिकित्सकों से संपर्क करता है। ऐसे में गंभीर मामलों की समय पर पहचान कर रोगियों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में ये चिकित्सक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और कई बार जीवन रक्षक सिद्ध होते हैं।

उन्होंने जनजातीय जिलों में मलेरिया, तपेदिक एवं कुष्ठ जैसी संक्रामक बीमारियों की निरंतर उपस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इनके उन्मूलन हेतु लक्षित एवं अंतिम प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

अतिरिक्त आयुक्त कृष्णपाल सिंह चौहान ने बताया कि जनजातीय कार्य मंत्रालय की यह पहल आदिवासी क्षेत्रों में अंतिम छोर तक समावेशी विकास और समुदाय नेतृत्व के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण के दृष्टिकोण के अनुरूप है। कार्यशाला के द्वितीय सत्र में डॉ प्रदीप द्विवेदी ने जनजातीय गुणीजनों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सेतु के रूप में कार्य करने का आह्वान किया। वहीं डॉ राखी द्विवेदी द्वारा ई-पी क्लिनिक की प्रायोगिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया, जिसके माध्यम से जनजातीय चिकित्सक टेलीमेडिसिन के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकेंगे।

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