टीबी मुक्त भारत अभियान- 100 दिवसीय का शुभारंभ

टीबी मुक्त भारत अभियान- 100 दिवसीय का शुभारंभ
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उदयपुर, । विश्व टीबी दिवस के अवसर पर राज्य में “टीबी मुक्त भारत अभियान-100 दिवसीय तहत उदयपुर जिले मे शुभारंभ कार्यक्रम का जिला क्षय निवारण केंद्र पर बुधवार सुबह चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अशोक आदित्य एवं जिला क्षय अधिकारी डॉ पियूष सोनी द्वारा 2 निक्षय वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अशोक आदित्य ने बताया कि टीबी (क्षय रोग) केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक रूप से व्यक्ति एवं परिवार को प्रभावित करने वाली एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “टीबी मुक्त भारत” के संकल्प की दिशा में राजस्थान पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि में चिन्हित उच्च जोखिम वाले ग्रामों में आयुष्मान आरोग्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना एवं टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि यह 100 दिवसीय अभियान जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन का रूप लेगा तथा प्रत्येक मरीज तक समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। उदयपुर ने डेटा एवं तकनीक आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए उच्च जोखिम क्षेत्रों की पहचान की है। राज्य के 183 चिन्हित ग्रामों एवं शहरी क्षेत्रों में शिविरों के माध्यम से टीबी उन्मूलन की गति को और तेज किया।

जिला क्षय अधिकारी डॉ पियूष सोनी ने बताया कि उदयपुर में प्रत्येक उच्च जोखिम क्षेत्र में सघन स्क्रीनिंग, एनएएटी जांच एवं उपचार सेवाओं को मजबूत किया गया है, जिससे संभावित मरीजों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित हो रही है। उन्होंने बताया कि 100 दिवसीय अभियान के तहत शिविरों में 14 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों की जांच की जाएगी, जिसमें टीबी स्क्रीनिंग, हीमोग्लोबिन (एचबी), ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर (बीपी), बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई), छाती का एक्स-रे शामिल होंगे। किसी व्यक्ति का एक्स-रे असामान्य पाया जाता है, तो उसका बलगम सैंपल लेकर एनएएटी जांच की जाएगी। एनएएटी जांच में टीबी की पुष्टि होने पर मरीज को तुरंत निःशुल्क एवं मानक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।

अभियान के अंतर्गत सामूहिक निवास स्थलों में रहने वाले व्यक्ति समूहों पर विशेष फोकस किया जाएगा, जिनमें छात्रावास, वृद्धाश्रम, अनाथ आश्रम, जेल, किशोर निरोध केंद्र, निराश्रित केंद्र, रैन बसेरा, बीपीएल आवास, औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर भी सघन स्क्रीनिंग एवं जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

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