शास्त्रीय गायन से सुरमई बनी शाम... नृत्य प्रवाह में खूब झूमे दर्शक

शास्त्रीय गायन से सुरमई बनी शाम... नृत्य प्रवाह में खूब झूमे दर्शक
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उदयपुर । पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर की ओर से से शिल्पग्राम में आयोजित तीन दिवसीय ‘ऋतु वसंत’ उत्सव के अंतिम दिन रविवार को प्रख्यात शास्त्रीय गायक जयतीर्थ मेवुंडी की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, उत्सव की अंतिम प्रस्तुति के रूप में विभिन्न क्लासिकल डांस के संगम ‘नृत्य प्रवाह’ ने दर्शकों को नई ऊर्जा प्रदान करते हुए झूमने और वाहवाही करने को मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान केंद्र के निदेशक फुरकान खान व अतिथियों ने कलाकारों का स्वागत किया।

मशहूर क्लासिकल सिंगर जय तीर्थ मेवुंडी ने कार्यक्रम का शुभारंभ राग यमन कल्याण झपताल की बंदिश “पिया बिन रतिया...” से किया। उन्होंने इस पहली पेशकश से ही श्रोताओं को सम्मोहित कर दिया। उन्होंने राग की गंभीरता एवं माधुर्य को स्वर विस्तार और सुगठित आलाप के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

मेवुंडी की तीनताल में बंदिश “श्याम बजाए आज मुरलिया...” ने वातावरण को कृष्णमय बना दिया। उनके सुर और लय के सुंदर संतुलन तथा प्रभावशाली तानों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं, उन्होंने राग सोहनी में तीनताल का तराना “रंग ना डारो श्यामजी...” पेश कर संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया।

इसके बाद मेवुंडी ने राग मिश्र तिलंग में पेश ठुमरी “नैनों में जादू...” से श्रृंगार रस से शिल्पग्राम में मनोहारी माहौल बना दिया। उन्होंने भजन “ठुमक ठुमक पग...” और राग वसंत में 'केतकी गुलाब ...' में उन्होंने भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम पेश कर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। उनके साथ तबले पर पंडित अभिषेक मिश्रा और हारमोनियम पर तरुण जोशी ने संगत की।

‘नृत्य प्रवाह’ का छाया जादू-

ऋतु वसंत की अंतिम पेशकश के रूप में प्रसिद्ध कोरियोग्राफर संतोष नायर के निर्देशन में ‘नृत्य प्रवाह’ ने जहां दर्शकों में नई ऊर्जा का संचार कर दिया, वहीं एक से बढ़कर एक प्रस्तुति और फिर फिनाले की धमक से उत्सव को यादगार बना दिया। इसकी शुरुआत स्वागतम के बाद गणेश वंदना से हुई। इसमें अलग-अलग क्लासिकल नृत्यों में शामिल डांसर्स ने शिरकत कर प्रथम पूज्य को रिझाया। फिर, भगवान विष्णु के माेहिनी रूप को समर्पित केरल के प्रसिद्ध मोहिनी अट्‌टम नृत्य ने खूब वाहवाही लूटी। वहीं, राधा-कृष्ण के प्रेम को समर्पित मणिपुरी नृत्य ने वातावरण को प्रेममयी बना दिया। इसके साथ ही भक्ति, लय और भावपूर्ण अभिनय का संगम ओडिसी नृत्य ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद कथक की प्रस्तुति ने क्लासिकल डांस प्रेमियों की खूब दाद पाई। इसी कड़ी में प्रस्तुत भरत मुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ पर आधारित तमिलनाडु के शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम में डांसर्स ने भाव, राग और ताल का सुंदर सम्मिश्रण पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद जब ‘नृत्य प्रवाह’ में ये सभी डांस आकर शामिल हुए तो क्लासिकल नृत्यों का अनूठा संगम बन गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। नृत्य प्रवाह पूर्णता की ओर बढ़ा और शानदार, धमकदार और यादगार फिनाले के रूप में तब्दील हुए तो तमाम दर्शक झूमने लगे और वातावतण देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

उत्सव के तीनों दिन मंच संचालन मोहिता दीक्षित ने किया।

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