प्रभु श्रीराम के जयकारों के साथ सम्पन्न हुई नौ दिवसीसी रामकथा

प्रभु श्रीराम के जयकारों के साथ सम्पन्न हुई नौ दिवसीसी रामकथा
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उदयपुर,। हिरण मगरी सेक्टर 14 स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण जेके ब्लॉक में संगीतमय रामकथा का समापन शनिवार को पूर्णाहुति के साथ हुआ। नवें दिन पूर्णाहुति में कथा में पुष्कर दास महाराज ने कहा रामकथा दोनों हाथों की ताली है । राम कृपा बिना कोई भी कार्यक्रम सफल नहीं होता, सत्कर्म कभी दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए। दिखावे से किया गया सत्कर्म या कोई भी कार्य कभी सफल नहीं होता। पद ओर सत्ता का नशा कभी नहीं उतरता, पंचवटी का मतलब पांच तत्व का पुतला, किसी को आदर देना वो सबसे बड़ी पूजा है। भक्ति प्राप्त होती है सत्संग में, संत मिलते हे सत्संग से, चौपाई प्रथम भगति संतन कर संगा, रामकथा के सार को समझने की जरूरत है।

महाराज ने कहा सभी को नित्य रामायण का पाठ करना चाहिए। हम कोई भी सत्कर्म, पूजा, पाठ करते हे परन्तु जब तक सत्संग में नहीं बैठेंगे तब तक सत्कर्म की विधि का ज्ञान नहीं हो सकता। कथा को आगे बढ़ाते हुए शबरी का प्रसंग और नवधा भक्ति की चर्चा करते हुए राम सुग्रीव की मित्रता और बाली के वध का वर्णन किया। सुंदरकांड की व्याख्या करते हुए कहा कि प्रभु भक्ति के बिना जीवन कभी सुंदर नहीं हो सकता इसलिए रावण सीता रूपी भक्ति को लंका में ले गया और सबका उद्धार किया। रावण उच्च कुल का बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति था, शास्त्रों का सही तत्वार्थ नहीं समझने के कारण हम रामायण के सभी पात्रो को समझने में भूल कर जाते है। अध्यात्म मार्ग में शास्त्रों के अर्थ समझने के लिए सत्संग करना पड़ता है। शास्त्र पढ़ने में और सत्संग करने में बहुत बड़ा अंतर है। दस इंद्रियों पर विजय प्राप्त हो वही विजयदशमी है। कथा में राम राज्य का उत्सव मनाया, पूर्णाहुति के दिन सभी श्रद्धालुओं ने महाआरती की ओर पूरा प्रांगण रामजी के जयकारों से गूंज उठा।

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