’राज्य के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की उपस्थिति में आयोजित हुई समीक्षा बैठक’

जयपुर/उदयपुर, । भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 का कार्य सुव्यवस्थित, पारदर्शी एवं समयबद्ध रूप से संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को सचिवालय में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त विशेष रोल पर्यवेक्षक द्वारा राज्य में चल रही पुनरीक्षण प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने बताया कि विशेष रोल पर्यवेक्षक आईएएस अदिति सिंह ने सचिवालय में आयोजित बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में राज्य के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में पुनरीक्षण की विभिन्न गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
श्री महाजन ने बताया कि इस व्यापक अभियान में 41 जिला निर्वाचन अधिकारी, 200 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 854 से अधिक सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 6,373 बीएलओ पर्यवेक्षक, 61,404 बीएलओ, 2.03 लाख से अधिक स्वयंसेवक तथा 1.06 लाख से अधिक बीएलए सक्रिय रूप से सहभागी हैं। राज्य में यह विशेष गहन पुनरीक्षण 41 जिलों की 200 विधानसभा क्षेत्रों में संचालित किया जा रहा है।
’पुनरीक्षण की प्रमुख गतिविधियाँ’
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के अंतर्गत पूर्व-गणना चरण में मतदाताओं को उनकी जन्मतिथि एवं वर्ष 2002 की अंतिम विशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया। राज्य स्तर पर डाटाबेस आधारित मैपिंग की गई तथा बीएलओ को आवश्यक प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए गए। वर्ष 2002 की मतदाता सूचियाँ सत्यापन हेतु उपलब्ध कराई गईं तथा अंतर-विधानसभा एवं अंतर-राज्य समन्वय स्थापित किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप गणना चरण से पूर्व ही लगभग 70 प्रतिशत मतदाताओं की सफल मैपिंग सुनिश्चित की गई।
’गणना एवं प्रारूप प्रकाशन’
उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को 199 विधानसभा क्षेत्रों (अन्ता विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर) में विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की गई। कुल 5.46 करोड़ मतदाताओं को गणना प्रपत्र जारी किए गए, जिनमें से 5.04 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची में सम्मिलित किए गए। इनमें से 98.36 प्रतिशत मतदाताओं की वर्ष 2002 की मतदाता सूची से सफल मैपिंग की गई।
श्री महाजन ने बताया कि 16 दिसंबर 2025 को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। इसके बाद अंता विधानसभा क्षेत्र की प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन 12 जनवरी 2026 को किया गया। इस दौरान मतदान केन्द्रों का युक्तिकरण करते हुए उनकी संख्या 52,469 से बढ़ाकर 61,404 की गई, जिससे मतदाताओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
’पारदर्शिता एवं दावा-आपत्ति प्रक्रिया’
श्री महाजन ने बताया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु सभी राजनीतिक दलों को एएसडी सूचियाँ उपलब्ध कराई गईं। प्रारूप मतदाता सूची, दावा-आपत्ति विवरण तथा अपवर्जित मतदाताओं की सूचियाँ मतदान केन्द्रों, पंचायत/शहरी निकाय कार्यालयों एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रदर्शित की गई हैं।
उन्होंने बताया कि 16 दिसंबर 2025 से 7 फरवरी 2026 तक जारी नोटिस चरण के दौरान लगभग 8.28 लाख मतदाताओं को दस्तावेज प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किए गए। इस चरण की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त रोल पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची से वंचित न रहे।
’रोल पर्यवेक्षकों की भूमिका’
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि रोल पर्यवेक्षकों को प्रत्येक जिले का न्यूनतम तीन बार भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं -दावा-आपत्ति प्राप्ति, उनके निस्तारण तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के चरण में। इन भ्रमणों के माध्यम से फील्ड स्तर पर कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा नियमित रूप से मीडिया ब्रीफिंग कर विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 की प्रगति से आमजन को अवगत कराया जा रहा है। राजस्थान में अपनाई गई सर्वात्तम प्रक्रियाओं का अध्ययन करने हेतु अन्य राज्यों के निर्वाचन विभागों के अधिकारियों द्वारा भी राज्य का भ्रमण किया गया है।
बैठक में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ समस्त संभाग प्रभारी अधिकारी एवं निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी शाहपुरा, बस्सी, चौमू एवं हवामहल भी उपस्थित रहे।
