पशुधन से भी राज्य की देश में विशेष पहचानः डॉ. छंगाणी

उदयपुर, ।
"विश्व पशु दिवस" के अवसर पर पशुपालन एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राज्य के पशुधन और पशु उत्पादन से जुड़ी विशिष्ट पहचान को रेखांकित किया गया। संस्थान के उपनिदेशक डॉ. सुरेन्द्र छगाणी ने लिफलेट (पर्चा) का विमोचन करते हुए यह संबोधन दिया।
देश में राजस्थान के पशुधन की स्थिति
डॉ. छगाणी ने बताया कि राजस्थान ने देश के पशुधन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है:
संख्या में योगदान: देश के कुल पशुधन का 10% से अधिक राजस्थान में मौजूद है।
शीर्ष स्थान (2019 पशुगणना): देशभर में ऊँटों और बकरियों की संख्या के मामले में राजस्थान सिरमौर बना हुआ है।
अन्य स्थान: भैंस वंश में दूसरा, भेड़ वंश में तीसरा और अश्व वंश में चौथा स्थान है।
उत्पादन में सर्वोच्चता
उत्पादन के मामले में राजस्थान देश में अग्रणी है:
ऊन उत्पादन: राजस्थान सम्पूर्ण देश में ऊन उत्पादन में सर्वाच्च (47.98%) स्थान पर है।
दुग्ध उत्पादन: राज्य दुग्ध उत्पादन में दूसरे स्थान पर है, जो देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 14.44% है।
प्रति व्यक्ति उपलब्धता: देश में औसत प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता (459 ग्राम प्रतिदिन) की तुलना में, राज्य में यह उपलब्धता 1138 ग्राम प्रतिदिन है।
अर्थव्यवस्था में योगदान: पशुपालन राज्य के कुल सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में लगभग 13.44% का महत्वपूर्ण योगदान देता है।
डॉ. छगाणी ने यहाँ के घोड़ा, ऊँट, भेड़, बकरी, गाय की विभिन्न नस्लों की देश और विदेश में बढ़ती लोकप्रियता पर भी गर्व व्यक्त किया।
पशु कल्याण का संकल्प
इस अवसर पर वक्ताओं ने पशु संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर ज़ोर दिया:
डॉ. पदमा मील (वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी) ने कहा कि पृथ्वी तभी सुरक्षित रहेगी जब वहाँ का पशुधन सुरक्षित होगा, इसलिए सभी को पशुओं के प्रति दया, प्रेम और करुणा का भाव रखना चाहिए।
डॉ. ओमप्रकाश साहू (वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी) ने कहा कि राज्य में पशुधन पर्याप्त संसाधन के रूप में उपलब्ध है, और पशुपालन व्यवसाय को गंभीरता से लेकर प्रति पशु उत्पादन में वृद्धि की संभावनाओं को तलाशना चाहिए।
