खनन नियमों की अनदेखी पर उदयपुर प्रशासन सख्त, 9 फेल्सपार पट्टों पर जांच तेज

उदयपुर। अरावली संरक्षण को लेकर राज्य सरकार के निर्देशानुसार अवैध खनन की रोकथाम के लिए अरावली विस्तार वाले जिलों में विशेष अभियान के तहत उदयपुर जिले में प्रभावी कार्यवाहियां जारी हैं। इसी क्रम में उदयपुर में खनिज फेल्सपार के खनन पट्टों में उत्पादन व निर्गमन में पाई गई असामान्य विसंगतियों को गंभीरता से लेते हुए जिला कलक्टर नमित मेहता के निर्देश पर खनन विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 के दौरान कुछ खनन पट्टों में उत्पादन में अत्यधिक अंतर सामने आने के बाद विभाग ने प्रारंभिक जांच कर कुल 9 खनन पट्टों को चिन्हित किया है।
खनि अभियंता आसिफ अंसारी ने बताया कि स्थिति की वास्तविकता सामने लाने के लिए विभाग द्वारा राजस्थान राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (आरएसएमईटी) के माध्यम से ड्रोन सर्वे कराकर वॉल्यूमेट्रिक गणना की जा रही है। इस सर्वे के जरिए खनन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, अवशिष्ट खनिज भंडार और वास्तविक उत्खनन का तकनीकी एवं तथ्यपरक आकलन किया जा रहा है। खास बात यह है कि फेल्सपार वेन/डिपॉजिट की प्रकृति को देखते हुए भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों की टीम को भी सर्वे में शामिल किया गया है, जिससे जांच पूरी तरह वैज्ञानिक और पारदर्शी रहे।
उक्त श्रेणी में शामिल 9 में से 8 खनन पट्टों का ड्रोन सर्वे पूर्ण हो चुका है। जिन खनन पट्टों का सर्वे किया गया है, उनमें खनन पट्टा संख्या 161/2010 - मानक श्याम मिनरल्स, 4/2023 - प्यारी डांगी, 154/2010 - गुरु आशीष मिनरल्स, 5/2020 - लक्ष्मीचन्द भंसाली, 7/2018 - प्रभुसिंह, 11/2019 - भागचन्द, 12/2019 - धनना कुम्हार तथा 6/2020 - अर्पित भंसाली शामिल हैं।
खनन विभाग ने स्पष्ट किया है कि ड्रोन सर्वे एवं सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित खनन पट्टाधारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अंसारी ने बताया कि अवैध खनन पर नियंत्रण, पारदर्शिता बनाए रखने और राजस्व हितों की सुरक्षा के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आगे भी इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे।
