डूंगरपुर पुलिस कस्टडी में युवक की मौत: सांसद की सख्त मांगों के बीच तनाव चरम पर

डूंगरपुर : राजस्थान के डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाना क्षेत्र में चोरी के आरोप में गिरफ्तार युवक दिलीप अहारी के साथ कथित पुलिस मारपीट के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उदयपुर के महाराणा भूपाल चिकित्सालय में भर्ती युवक की मंगलवार दोपहर साढ़े तीन बजे मौत हो गई, जिसके बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने कलेक्ट्री के बाहर धरना शुरू कर दिया तथा मुख्य मार्ग जाम कर प्रशासन पर न्याय की मांग की।
हादसे और मौत का क्रम
दोवड़ा थाना पुलिस ने चोरी के संदेह में दिलीप अहारी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान कथित तौर पर उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। तत्काल उदयपुर रेफर किए गए युवक का इलाज चल रहा था, लेकिन दोपहर करीब 3:30 बजे डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस हिरासत में ही युवक को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और बैठक
मौत की खबर फैलते ही डूंगरपुर कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने तुरंत डूंगरपुर, आसपुर तथा चौरासी के विधायकों और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ कलेक्ट्री में आपात बैठक बुलाई। बैठक में मृतक के परिजनों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने तथा मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को पुनः वार्ता के लिए आमंत्रित किया है, ताकि धरना समाप्त हो सके।
सांसद राजकुमार रोत की कड़ी मांगें
डूंगरपुर-सबदगढ़ा सांसद राजकुमार रोत ने घटना को पुलिस की बर्बरता करार देते हुए सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि युवक के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, जो आदिवासी समाज के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है। सांसद की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
दोवड़ा थाना के अधिकारियों सहित सभी आरोपी पुलिसकर्मियों की तत्काल बर्खास्तगी।
हत्या तथा अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करना।
मृतक परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान सार्वजनिक करना।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल का गठन।
सांसद ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और तेज होगा।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
यह घटना डूंगरपुर जिले में आदिवासी समुदाय के बीच आक्रोश पैदा कर रही है। परिजन और ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस की मनमानी से अब न्यायिक जांच ही एकमात्र विकल्प बचा है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, जबकि विपक्षी दल भी मामले को विधानसभा में उठाने की बात कह रहे हैं। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है, लेकिन परिजनों के आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही
