प्रेम दिवस पर विशेष कविता

आज वैलेंटाइन खूब याद करना,
तुम गुलाब नहीं मुझे याद करना।
हाँ, याद रखना हर वो एक बात,
जिस पर तुम फिदा हो मेरे साथ।
वो सौन्दर्यबोध व होठों की लाली,
लट बिखेर रहीं जुल्फें वो काली।
आज वैलेंटाइन खूब याद करना,
तुम गुलाब नहीं मुझे याद करना।
उन्माद भरी रातें,मीठी-मीठी बातें,
इंतजार में कटते दिन वे सौगातें।
पहली बार मांगी थी तुमसे लिफ्ट,
मिले मुझे तुमसे प्यार भरे गिफ्ट।
आज वैलेंटाइन खूब याद करना,
तुम गुलाब नहीं मुझे याद करना।
लगी जब मुझे चोट, देखी तड़प,
मैंने देखा आँसू गिरे पड़ी फफक।
जब मेरी पीठ पे रखा तुमने हाथ,
ये सोचा जिंदगी में चाहिए साथ।
आज वैलेंटाइन खूब याद करना,
तुम गुलाब नहीं मुझे याद करना।
सच, तुम्हारे प्यार की करू बात,
मेरे लिए ‘खटती‘ रही दिन-रात।
तुम खूब लड़ी अपने परिवार से,
मिले हम तो खातीर तेरे प्यार से।
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