किस-किसकी झोली में समाया दुलार...!

किस-किसकी झोली में समाया दुलार...!
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सच , वो कैसे संभाल रही होंगी अपने आप को,

दिलों जान से छोड़ गया चाहने वाला साथ को।

ऐसे असमय जाना उन्हें कितना अख़रता होगा,

आँसूओं को छोड़ो मन कितना पिघलता होगा।

ज़िक्र हो, जवाब दे जाती होगी उनकी हिम्मत,

ऐसे तो न छूटना था साथ पर यहीं थीं किस्मत।

सच वह कैसे संभाल रही होंगी अपने आप को,

दिलों जान से छोड़ गया चाहने वाला साथ को।

ईश्वर इतनी जल्दी क्यों? बुलाया मेरे दोस्त को,

हम सबके हृदय में जगह बनाने वाले होस्ट को।

क्या? दोष दे अब हम आप व आपके यम को,

सारी ज़िन्दगीभर भूला ना सकेंगे इस ग़म को।

सच वह कैसे संभाल रही होंगी अपने आप को,

दिलों जान से छोड़ गया चाहने वाला साथ को।

ज़ब आती हैं याद तब कैसे संभलता होगा दिल,

रूह काँप उठी होगी, होता होगा उन्हें भी फील।

आनंद मेरे यार, तुम कितना छोड़ गए हो प्यार,

न जाने किस-किसकी झोली में समाया दुलार।

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