अनोखा बैंक:: लोन में रुपए नहीं, 'बकरियां' मिलती हैं; ब्याज में भी मांगते हैं मेमने!

भीलवाड़ा। आपने बैंकों से पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन लेते तो बहुत देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी ऐसे बैंक के बारे में सुना है जो ग्राहकों को नकद पैसों के बजाय जिंदा बकरियां लोन में देता है? जी हां, ग्रामीण भारत के कुछ हिस्सों में शुरू हुआ यह 'गोट बैंक' मॉडल अब सोशल मीडिया और पशुपालकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है यह 'गोट बैंक' कॉन्सेप्ट?
इस अनोखे बैंक का उद्देश्य उन गरीब परिवारों या महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है जिनके पास निवेश के लिए पैसे नहीं हैं। इस सिस्टम में:
लोन की जगह बकरी: बैंक पात्र व्यक्ति को पैसे नहीं देता, बल्कि एक स्वस्थ बकरी उपलब्ध कराता है।
ब्याज में मेमने: लोन चुकाने का तरीका भी अनोखा है। कर्ज लेने वाले को कुछ समय बाद (जैसे 2-3 साल में) बैंक को बकरी के पैदा हुए बच्चे (मेमने) वापस करने होते हैं।
बीमा और स्वास्थ्य: बैंक ही इन बकरियों के टीकाकरण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालता है ताकि पशुपालक को नुकसान न हो।
भीलवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उम्मीद:
भीलवाड़ा जिला, जो अपनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री के साथ-साथ पशुपालन के लिए भी जाना जाता है, वहां इस तरह का मॉडल काफी कारगर साबित हो सकता है।
पशुपालन को बढ़ावा: राजस्थान सरकार की 'मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना' और 'राष्ट्रीय पशुधन मिशन' के तहत भी बकरी पालन के लिए 50% से 60% तक की सब्सिडी दी जा रही है।
बिना ब्याज का बोझ: इस 'वस्तु लोन' (Item Loan) से गरीब किसानों पर भारी ब्याज और किश्तों का दबाव नहीं रहता।
महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में सफल प्रयोग:
आपको बता दें कि महाराष्ट्र के अकोला में एक किसान ने सबसे पहले इस तरह का 'गोट बैंक' शुरू किया था, जहाँ 1200 रुपए के रजिस्ट्रेशन पर बकरी दी जाती थी और बदले में 40 महीने में 4 मेमने वापस लेने का करार होता था। अब इसी तर्ज पर कई स्वयं सहायता समूह (SHG) राजस्थान और अन्य राज्यों में इसे अपना रहे हैं।
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