संत दिग्विजय राम के भेख बहार आदेश पर उठे सवाल,आचार्यश्री बोले-मुझसे बिना पूछे हुआ आदेश, अनुमति नहीं ली

शाहपुरा।
रामस्नेही संप्रदाय की मुख्यपीठ रामनिवास धाम में संत दिग्विजय राम को भेख बहार करने के आदेश के बाद शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। शनिवार को इस मामले में ट्विस्ट आ गया। शुक्रवार को करीब ढाई दर्जन रामस्नेही संतों द्वारा संगत और पंगत के बहिष्कार का सत्याग्रह किए जाने के बाद यह मामला और भी चर्चा में आ गया था। इसी बीच शनिवार को अपरान्ह में संत दिग्विजय राम के समर्थक संतों और बड़ी संख्या में भक्तों ने संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्यश्री रामदयाल जी महाराज से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम से उन्हें अवगत कराया और भेख बहार करने के आदेश को रद्द करने की प्रार्थना की।
रामनिवास धाम में हुई इस मुलाकात के दौरान वातावरण काफी संवेदनशील बना रहा, लेकिन आचार्यश्री रामदयाल महाराज ने सभी संतों और भक्तों को शांत रहने और किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संप्रदाय की मर्यादा सर्वोपरि है और सभी को संयम बनाए रखना चाहिए। आचार्यश्री ने आश्वासन दिया कि उनके द्वारा प्रस्तुत की गई अर्जी पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
इस मुलाकात के बाद पूरे मामले में नया ट्विस्ट उस समय आ गया जब बातचीत के दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। इन वायरल वीडियो में आचार्यश्री रामदयाल महाराज स्वयं यह कहते नजर आ रहे हैं कि संत दिग्विजय राम को भेख बहार करने के आदेश के बारे में उनसे कोई स्वीकृति नहीं ली गई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भेख भंडारी संत का वे पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन इस मामले में उनसे पूर्व में कोई राय या अनुमति नहीं ली गई।
आचार्यश्री ने महाप्रभु रामचरणजी महाराज की सौगंध लेते हुए कहा कि उन्हें इस निर्णय के बारे में पहले नहीं बताया गया था। बाद में मामला उनके ध्यान में लाया गया। वायरल वीडियो में वे यह भी कहते दिखाई दे रहे हैं कि शुक्रवार को जो कुछ हुआ, उसमें शक्ति प्रदर्शन की जो स्थिति बनी, वह संप्रदाय की परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
आचार्यश्री ने आज मिले संतों और भक्तों को समझाते हुए कहा कि “सत्ता तो बदली जा सकती है, लेकिन सत्य को नहीं बदला जा सकता।” उन्होंने गुरू सेवा को संप्रदाय में सर्वोपरि बताते हुए सभी से धैर्य और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। आचार्यश्री ने स्पष्ट किया कि संप्रदाय में किसी भी निर्णय में संशोधन करने का अधिकार उनके पास भी सुरक्षित है और यदि आवश्यक हुआ तो इस विषय पर उचित निर्णय लिया जाएगा। संप्रदाय केवल संतों का नहीं है यह ग्रहस्थों का भी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके गुरू और श्रीजी महाराज समर्थ हैं और वे निश्चित रूप से ऐसा मार्ग निकालेंगे जिससे संप्रदाय की मर्यादा भी बनी रहे और सभी पक्षों को न्याय मिल सके।
