अज्ञात वाहन की टक्कर से गाय का पैर टूटा, तेज बारिश मे भीगती गाय दर्द से तड़पती रही, ग्रामीणों ने गौशाला में पहुंचाया

अज्ञात वाहन की टक्कर से गाय का पैर टूटा, तेज बारिश मे भीगती गाय दर्द से तड़पती रही, ग्रामीणों ने गौशाला में पहुंचाया

पीपलूंद (दुर्गेश रेगर)। शाहपुरा जिले के जहाजपुर उपखंड क्षेत्र के पीपलूंद कस्बे में स्थित बस स्टैंड के पास एमडीआर 7 सड़क किनारे देर रात बाद मध्य रात्रि 2 बजे के करीब अज्ञात वाहन ने सड़क पर बेठी गाय को टक्कर मार दी जिससे गाय का एक पैर टूट गया। उपसरपंच सावन टांक प्रभु मीणा, ज्ञानचंद सेन, ओम ओझा, नवल मूंदड़ा, सोनू पंचोली, महावीर सिंह सहित इत्यादि ग्रामीण लगभग देर रात 2 बजे मौके पर पहुंचे और गांव के ही बाबू लाल खाती को मौके पर बुलवाकर घायल हो रही गाय का प्राथमिक उपचार करवाया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि पीपलूंद में स्थित श्री देवदरबार आदर्श गौशाला के कार्यकर्ताओं को सूचित कर दिया और घायल अवस्था में पड़ी गाय की फोटो वीडियो बनाकर गौशाला के व्हाट्सएप ग्रुप में पोस्ट कर देने के बाद भी गुरुवार को सुबह से लेकर दोपहर 12 बजे तक पीपलूंद गौशाला का कोई भी गौ सेवक मदद के लिए आगे नहीं आया। जिसका खामियाजा गौ माता को भुगतना पड़ा 11 बजे के करीब आई तेज बारिश में घायल अवस्था में पड़ी गौमाता बारिश में भीगती रही। लेकिन श्री देवदरबार गौशाला का कोई भी गौ सेवक आकर गाय को न तो सुरक्षित जगह पर रखवाया और न ही गौशाला में लेकर गए। सड़क किनारे खुली जगह में गाय दर्द से तड़पती रही। तेज बारिश में भीगती रही। तेज बारिश के बीच ग्रामीणों की सहायता से गाय को उठाकर सुरक्षित जगह पर रखवाया और ग्रामीणों ने अपने स्तर पर मिनी टेंपो में गाय को रखवाकर खजूरी गांव में स्थित नंद गोपाल गौशाला में पहुंचाया गया। पीपलूंद के ग्रामीणों और उपसरपंच सावन टांक ने कहा की पीपलूंद की गौशाला केवल नाम मात्र की गौशाला है। अगर गौ सेवक सुबह मौके पर पहुंच कर गाय को सुरक्षित जगह पर रखवा देते या फिर गौशाला में ले जाते तो घायल अवस्था में सड़क किनारे पड़ी गाय तेज बारिश में दर्द से तड़पती नही और बारिश में भीगती नही। ऐसे गौ सेवकों की गौ सेवा करने का कोई मतलब नहीं है जो कठिन परिस्थिति में भी गायों की सेवा न कर सके।

इस दौरान अशोक टांक , कमलेश धोबी , शंकर रेगर , सोजी माली, ओमजी ओझा, उप सरपंच सावन टांक, नरेश मीणा, महेन्द्र बलाई , मुस्ताक, नेबी टांक, रतन टांक, सहित इत्यादि ग्रामीण मौजूद रहे।

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