गौरा का खेड़ा में गूंजी बगड़ावत गाथा:: नवरात्रि के पावन पर्व पर देवनारायण जी की वीरता का लोक कलाकारों ने किया बखान

नवरात्रि के पावन पर्व पर देवनारायण जी की वीरता का लोक कलाकारों ने किया बखान
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कोटड़ी (हलचल)। क्षेत्र के गौरा का खेड़ा गांव में नवरात्रि के शुभ अवसर पर भगवान श्री देवनारायण की शौर्य गाथा और 'बगड़ावत कथा' का भव्य आयोजन किया गया। भक्ति और वीरता के अनूठे संगम के साथ लोक कलाकारों ने फड़ वाचन के माध्यम से 24 बगड़ावत भाइयों के पराक्रम की प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर ग्रामीण भावविभोर हो गए।

बगड़ावतों के त्याग और शौर्य का हुआ गायन

इस विशेष आयोजन में गुर्जर भोपाओं द्वारा पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ अजमेर के राजा बीसलदेव के भाई मांडलजी (देवनारायण जी के पूर्वज) से शुरू होने वाले इस महान वंश की गाथा सुनाई गई। कथा में बताया गया कि किस प्रकार गुर्जर जाति के पशुपालक बगड़ावतों ने अपने वचन पालन और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी।





सवाई भोज का पराक्रम: कथा में सवाई भोज की वीरता और राणी जयमती के लिए राजा दुर्जनसाल के साथ हुए ऐतिहासिक युद्ध का मार्मिक वर्णन किया गया।

फड़ वाचन: लोक कलाकारों ने फड़ के माध्यम से बगड़ावतों के पराक्रम, उनकी गायों की नस्ल सुधार और उनके द्वारा किए गए त्याग को जन-जन तक पहुंचाया।

धर्म की स्थापना और देवनारायण अवतार

गाथा में आगे बताया गया कि बगड़ावतों की वीरगति के बाद, अन्याय का अंत करने के लिए भगवान विष्णु के अंश के रूप में श्री देवनारायण का अवतार हुआ। उन्होंने ही राजा दुर्जनसाल का वध कर बगड़ावतों की मृत्यु का बदला लिया और धर्म की पुनर्स्थापना की।





लोक संस्कृति का अनूठा उदाहरण

राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति का हिस्सा यह कथा प्रेम, त्याग, और वीरता का अनुपम उदाहरण है। कोटड़ी क्षेत्र के गौरा का खेड़ा में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और भगवान देवनारायण के जयकारों से पूरा माहौल धर्ममय हो गया।

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