निलंबन निरस्त नहीं होने पर वन कर्मियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी

शाहपुरा (मूलचन्द पेसवानी)। शाहपुरा वन क्षेत्र में कार्यरत दो सहायक वनपालों के निलंबन को प्रारंभिक जांच में आरोप सिद्ध नहीं होने के बावजूद अब तक निरस्त नहीं किए जाने पर राजस्थान वन अधीनस्थ कर्मचारी संघ शाखा भीलवाड़ा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ ने इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक जयपुर को ज्ञापन भेजते हुए सात दिनों के भीतर निलंबन निरस्त नहीं होने पर आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और राजकार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
संघ द्वारा भेजे गए ज्ञापन में बताया गया कि मुख्य वन संरक्षक अजमेर के आदेश क्रमांक एफ 5 ( ) 2025 / जांच मुवसं / 6827-35 दिनांक 9 नवंबर 2025 के तहत शाहपुरा नाका प्रभारी सहायक वनपाल विश्राम मीणा तथा पीलीमगरा रेंज के बीट इंचार्ज सहायक वनपाल शंकर लाल माली को निलंबित किया गया था। संघ ने प्रारंभ से ही इस निलंबन को पूर्णतः अनुचित और तथ्यहीन बताते हुए इसका विरोध किया था।
संघ का कहना है कि निलंबन आदेश के विरोध में 10 नवंबर 2025 को उप वन संरक्षक भीलवाड़ा के माध्यम से विधिवत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया था। इसके पश्चात 17 नवंबर 2025 को संघ के पदाधिकारियों ने स्वयं उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक जानकारी भी दी थी। उस दौरान सकारात्मक वार्ता के बाद यह आश्वासन दिया गया था कि यदि प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध नहीं होते हैं तो दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबन से बहाल कर दिया जाएगा।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रारंभिक जांच अधिकारी द्वारा 28 नवंबर 2025 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि दोनों सहायक वनपालों की भूमिका कहीं भी संदेहास्पद नहीं पाई गई तथा लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हुए। इसके बावजूद आज दिनांक तक न तो निलंबन निरस्त किया गया और न ही किसी प्रकार की स्पष्ट कार्यवाही की गई, जिससे कर्मचारियों में गहरी निराशा और असंतोष व्याप्त है।
संघ ने चेताया है कि निलंबन की लंबी और अनुचित प्रक्रिया से दोनों कर्मचारी मानसिक रूप से हतोत्साहित और तनावग्रस्त हो रहे हैं। इसका विपरीत प्रभाव अन्य कर्मठ वन कर्मचारियों पर भी पड़ रहा है, जिनमें यह संदेश जा रहा है कि निर्दोष होने के बावजूद प्रशासन से समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा। इससे विभागीय कार्यसंस्कृति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और कर्मचारियों में रोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
राजस्थान वन अधीनस्थ कर्मचारी संघ शाखा भीलवाड़ा ने स्पष्ट किया है कि यदि सात दिवस के भीतर दोनों सहायक वनपालों को निलंबन से बहाल नहीं किया गया तो संघ को मजबूरन आंदोलनात्मक कदम उठाने पड़ेंगे। इसके तहत धरना-प्रदर्शन, विरोध सभाएं और राजकीय कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। संघ ने यह भी चेताया कि आंदोलन की स्थिति में वन क्षेत्रों में होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान की जिम्मेदारी वन प्रशासन की होगी।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन केवल दो कर्मचारियों के हित का मामला नहीं है, बल्कि यह कर्मचारियों के आत्मसम्मान, न्याय और निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ प्रश्न है। जब प्रारंभिक जांच में आरोप सिद्ध नहीं होते, तो निलंबन बनाए रखना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि नियमों और नैतिकता के भी विपरीत है।
ज्ञापन के अंत में संघ ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक की त्वरित और न्यायोचित कार्यशैली पर विश्वास जताते हुए आशा व्यक्त की है कि वे मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर दोनों कर्मचारियों को न्याय दिलाएंगे और प्रशासन व कर्मचारियों के बीच विश्वास को कायम रखेंगे।
